राकेश केशरी
आंठ विकास खण्ड़ वाले जिले में झोपड़ी में रह रहें बीस हजार गरीब परिवार!
कौशाम्बी। गांव में गरीब की झोपड़ी शासन द्वारा विकास के लिए दिये जाने वाले करोड़ों के बजट पर एक तमाचा है। सर्वे पर सर्वे हुए,रिपोर्ट दर रिपोर्ट तैयार होती रही,पर इनकी झोपड़ी में विकास की किरण नहीं पहुंच सकी। जब भी कुछ नया करने को हुआ तो कागजों पर एक तस्वीर उकेर कर शासन को भेज कर इति श्री कर ली गयी। थोड़ी चहल पहल के बाद सारा कुछ फिर शांत हो गया। झोपड़ी में बीस हजार गरीबों के रहने का आकड़ा कोई अनुमानित नहीं, बल्कि प्रशासन का है। शासन के निर्देश पर अफसरों की टीमों ने ब्लाकवार सर्वे कर अस्थाई या स्थाई झोपड़ी में रहने वालों की रिपोर्ट तैयार की। इस तरह जिले में करीब बीस हजार गरीबों की रिपोर्ट शासन को भेजी गयी। हैरानी की बात यह है कि मनरेगा या फिर अन्य योजनाओं में प्रति वर्ष जिले को करीब एक अरब से अधिक रुपये मिलते हैं। इसके बावजूद इन पैसों की चमक आखिरकार गरीबों की झोपड़ी तक क्यो नहीं पहुंचती। लेकिन यह भी सच हैं कि जिलें के ग्रामीण क्षेंत्रों में आज भी पालीथिन व खरपतवार डालकर किसी तरह अपना गुजर बसर करने वालों की किस्मत में अंबर ही छत व धरती ही विस्तर के रूप में शरण देती है।

Today Warta