राकेश केशरी
कौशाम्बी। आधुनिकता के इस दौर में जहां प्रत्येक बच्चे-बूढ़े का रुझान मोबाइल, कंप्यूटर या फिर लैपटॉप की ओर बढ़ रहा है, वहीं स्कूली छात्र भी कुछ हद तक इन आधुनिक तकनीकों के जाल में फंस कर अपनी पढ़ाई-लिखाई व पारिवारिक रिश्तों से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। बच्चों के परिजन व अध्यापक जब उन्हें मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते देखते हैं तो गर्व महसूस करते हैं कि उनके बच्चे भविष्य में कोई नया कीर्तिमान स्थापित कर अपने परिजनों के साथ-साथ अध्यापकों का भी नाम रोशन करेंगे, लेकिन परिजनों व अध्यापकों को इस बात का जरा भी अहसास नहीं होता है कि शुरूआती कक्षाओं में ही बच्चों का इस तरह से मोबाइल, कम्प्यूटर में व्यस्त होना उनके सर्वपक्षीय विकास पर प्रभाव डालेगा। चिकित्सक डा0 अरूण केशरवानी ने कहा कि बच्चों के माता-पिता को चाहिए कि वे मासूम बच्चों को मोबाइल पर यू-ट्यूब आदि दिखाने की अपेक्षा उन्हें बिल्डिग ब्लाक, पेंटिग आदि का सामान दें, ताकि बच्चों में क्रिएटिव माइंड हो।

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