राकेश केशरी
मजदूरों को रोजगार देने के बजाय पक्के काम अधिक कराए जा रहे हैं
एपीओ की अवैध वसूली के बाबत अभी तक आला अधिकारियों के कानों में कमीशन खोरी की जूं नहीं रेंगी
कौशाम्बी। मजदूरों को रोजगार देने के नाम पर चलाई जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बीते कई वर्षों से कमीशन खोरी की भेंट चढ़ गई है खंड विकास कार्यालय में मौजूद एपीओ बेखौफ तरीके से योजना में 20 प्रतिशत की कमीशन खोरी कर रहे है,मनरेगा योजना में खुलेआम हो रही कमीशन खोरी के बाबत डीसी मनरेगा भी मूकदर्शक बने हुए हैं,जिससे मनरेगा योजना पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। मनरेगा योजना में बढ़ते कमीशन खोरी के चलते मजदूरों को रोजगार देने के बजाय पक्के काम अधिक कराए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों को रोजगार ठीक से नहीं मिल रहे हैं। मनरेगा योजना में पक्के काम अधिक कराए जाने के आड़ में 20 प्रतिशत की कमीशन खोरी से जुड़े एपीओ और डीसी मनरेगा मालामाल हो रहे हैं एपीओ के 20 प्रतिशत कमीशन खोरी के चलते ग्राम पंचायत के जिम्मेदार ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। सरसवां विकासखंड में मनरेगा योजना से कराए गए कार्यों में एपीओ द्वारा 20 प्रतिशत की वसूली किए जाने के मामले के बिरोध में बीते दिनों लोगों का आक्रोश उबाल पर आ गया और ग्राम प्रधानों ने प्रदर्शन भी किया था मनरेगा योजना के कार्यो में कमीशन खोरी के विरोध में खंड विकास कार्यालय सरसवां में हो हल्ला मचाए जाने के बाद भी कमीशन खोरी नहीं बंद हो सकी है बीते कई वर्षों से मनरेगा योजना में 20 प्रतिशत की एपीओ की अवैध वसूली के बाबत अभी तक आला अधिकारियों के कानों में कमीशन खोरी की जूं नहीं रेंगी है जिससे मनरेगा योजना में 20 प्रतिशत कमीशनखोरी की अवैध वसूली में लगे एपीओ और डीसी मनरेगा बेखौफ तरीके से मनरेगा के कार्यों में 20 प्रतिशत की वसूली कर रहे हैं। आखिर मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा चलाई गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कब तक एपीओ द्वारा कमीशन खोरी का यह खेल जिले में बेखौफ तरीके से चलता रहेगा,यह सरकार की पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है,लेकिन योगी सरकार में बेखौफ तरीके से कमीशन खोरी में लगे एपीओ के कारनामों को संज्ञान लेकर अभी तक सीडीओ और डीएम ने जांच कराकर दोषियों पर मुकदमा दर्ज करा कर उनकी गिरफ्तारी कराया जाना और उनके कमीशन खोरी के मामले को संज्ञान लेते हुए अभी तक शासन को पत्र नहीं लिखा है,जिससे सरकार की लचर व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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