राकेश केशरी
दोषियों को बचाने का डीपीआरओ पर लगा आरोप
कौशाम्बी। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर कार्यवाही कर जिन्हें दंडित किए जाने के अधिकार सरकार ने दिया है,जब वही हिस्सा वसूल कर भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएंगे तो सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति कैसे सफल होगी। ताजा मामला कौशाम्बी विकासखंड क्षेत्र के उरई अशरफ पुर गांव के पंचायत भवन को बिना अधिकार के ध्वस्त कर दिए जाने के मामले का है। जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत उरई अशरफ पुर में पंचायत भवन पूर्व के वर्षो में लाखों की लागत से बनाया गया था, पहले तो इस पंचायत भवन की मरम्मत कराए जाने की अधिकारियों से स्वीकृत ले ली जाए,लेकिन मरम्मत के बजाय पंचायत भवन को ग्राम प्रधान ने ध्वस्त कर दिया। भ्रष्टाचार कमीशन खोरी में लिप्त ग्राम प्रधान का कहना है कि पूर्व की बनी संपत्तियों को वह अपने कार्यकाल में उपयोग नहीं करेंगे और उन्होंने बिना किसी अधिकारी के पूर्व स्वीकृति के मजदूरों को लगा कर पंचायत भवन को ध्वस्त करा दिया। पंचायत भवन ध्वस्त किए जाने के बाद ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव में खींचतान शुरू हो गई,पंचायत सचिव ने पंचायत भवन ध्वस्त कराए जाने के मामले का विरोध किया,उन्होंने कहा कि पंचायत भवन ध्वस्त कराए जाने का अधिकारियों से स्वीकृति नहीं मिली है,इसलिए पंचायत भवन ध्वस्त कराया जाना गलत है। पंचायत भवन ध्वस्त कराए जाने के समय पंचायत सचिव ने डीपीआरओ को सूचना दिया,मामले को डीपीआरओ ने संज्ञान में लिया,लेकिन कुछ दिन बाद दोषी ग्राम प्रधान को दंडित किए जाने के बजाय मामले में लीपापोती शुरू हो गई। सूत्र बताते हैं कि डीपीआरओ के यहां से दो लाख दिए जाने का फरमान जारी हुआ अपनी गर्दन फसती देख ग्राम प्रधान ने दो लाख का इंतजाम किया,किसी माध्यम से मांगी गई रकम पहुंचा दिया दो लाख पहुंचते ही बिना अनुमति पंचायत भवन ध्वस्त कराए जाने की पत्रावली पर कार्यवाही ठंडी पड़ गई। महीनों बीत जाने के बाद दोषियों को दंडित नहीं किया गया लोगों ने शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बिना अनुमति के पंचायत भवन ध्वस्त कराए जाने के मामले की जांच कराते हुए दोषियों को दंडित किए जाने और पत्रावली पर कार्यवाही न करने वाले डीपीआरओ के कारनामों को भी संज्ञान लेकर कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

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