कमल सिंह
बाँदा/ के झलकारी बाई सभागार में समाजशास्त्र विभाग द्वारा दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सतत विकास एवं वैश्वीकरण नयी संभावनायें एवं चुनौतियाँ विषय पर आयोजित हुआ।*/ इस सत्र का शुभारम्भ सरस्वती वंदना और माल्यार्पण से हुआ। तत्पश्चात् समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष सबीहा रहमानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किया और संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्री वेद प्रकाश मौर्य (मुख्य विकास अधिकारी, बॉदा) के उद्बोधन से शुरू हुआ। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सतत् विकास के लक्ष्यों की संदर्भित किया। पृथ्वी, जल, वायु पर रहने वाले शीशे पर चिंता व्यक्त किया और कहा कि जैविक खेती के माध्यम से घर की बचत, कूडा-कचरा की कमी लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगें। प्रथम सत्र में विशिष्ट वक्ताप डॉ0 अरूण कुमार मौर्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि सतत् विकास एक संबंधित सिद्वान्त है जिसका उद्देश्य मानव विकास लक्ष्यों को पूरा करना है साथ ही साथ प्राकृतिक प्रजातियों को मानव की आवश्यक प्राकृतिक संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवायें प्रदान करने में सक्षम बनाना है। विशेषज्ञ विदेशी वक्ता में जगियोलेनियन विश्वविद्यालय पोलैण्ड के प्रो० किशोर कुमार ने अपने वक्तव्य में भारत एवं विश्व में आंकडों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित सतत् विकास लक्ष्यों के बारे में सविस्तारपूर्वक चर्चा किया। तूरान, कजाकिस्तान की डॉ० ममता सिंह ने कामकाजी महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण व उनके अधिकारों एवं लैंगिक असामनता के बारे में गहनतमपूर्वक चर्चा किया। एम0एच0कालेज गाजियाबाद के प्रो० राकेश राणा ने सतत् विकास के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में दिखाया कि आदि काल से आधुनिक काल तक मानव सभ्यता का विकास हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ0 आर0के0सिंह ने कहा सतत् विकास मनुष्य के लिए आवश्यक है और वी०एस०डी० कालेज कानपुर की नीलिमा सिंह ने ऐतिहासिक अवधारणा के बारे में बताया। डॉ० अंजू सोनकर ने अपने वक्तव्य में आज की भावी पीढी के बारे में बताया। समस्त अतिथियों का आभार डॉ० सबीहा रहमानी ने किया। प्राचार्य प्रो० दीपाली गुप्ता ने सभी विशिष्ट व्यक्तियों का क्रमबद्ध हदय से धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

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