राजेंद्र प्रसाद मिश्रा
बारा।क्षेत्र के सभी ग्राम पंचायतों में सरकार ने सामुदायिक शौचालय निर्माण करवाया, ताकि किसी भी व्यक्ति को बाहर शौच के लिए भटकना न पड़े। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, शौचालय निर्माण तो किया गया है,ग्रामीणों व राहगीरों के लिए यह उपयोगी साबित नहीं हो रहा है।कई स्थानों पर पंचायत-भवन के बगल में बना,जो केवल कर्मचारियों तक सिमट गया।ग्रामीण आज भी बाहर शौच जाने को मजबूर हैं।मानदेय से लेकर साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का पैसा आता है, जिसमें मानदेय छोड़कर सारा पैसा कहां चला जाता है, जानकारी नहीं हो पाती। अगर सच्चाई से जाँच पड़ताल की जाए तो विकासखंड जसरा, शंकरगढ़ सहित अधिकांश शौचालयों में ताला लटकता जरूर मिलेगा।क्षेत्र के कई शौचालय बस्ती से दूर बने हुए हैं तो कई एकदम किनारे, ताकि उपयोग में न आ सकें। सिर्फ सरकारी धन का कुछ स्थानों पर दुरुपयोग जरूर किया गया है,उपयोग बहुत ही कम हो रहा है।

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