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श्रीमद भावगत कथा का सातवां दिवस

Thursday, November 17, 2022

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र

श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता बनी मिशाल : दीप्ति श्रीजी

श्रीहनुमानजी महाराज को चांदी का मुकुट, हाथ कंगन, चूरा व थाल किया अर्पित

ललितपुर। सातवे दिवस की कथा में सुश्री दीप्ति श्रीजी ने श्रीमद् भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का भक्तों को श्रवण कराया जिसमें प्रभु कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ शादियां के प्रसंग के साथ, सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथायें सुनाई। इन कथाओं को सुनकर सभी भक्त भाव विभोर हो गए। कथा समापन के दौरान भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हो। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही भक्तो को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है तो वहीं इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते है। श्रीमद भागवत कथा के सातवें सुदामा चरित्र में सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढऩे लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा चरित्र व वर्णन किया। देख सुदामा की दीन दशा करुणा करके करुणानिधि रोये, पानी परात को हाथ छुये नही, नैनन के जल सो पग धोये। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। ऐसी कथा सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए। इस मौके पर अतिथियों ने व्यासपीठ का पूजन किया। मुख्य यजमान सीताराम विश्वकर्मा सह परिवार व सहयजमान- डीके तिवारी सपरिवार, प्रसाद की सेवा प्रेमनारायण कुशवाहा, भागवत कुशवाहा, महेंद्र सिंदवाहा, विनय श्रीवास्तव, मुकेश कुशवाहा, मनोज साहू, कृष्णकांत साहू, कमल यादव, देवेंद्र निरंजन, सोनू सेन द्वारा की गयी। इस मौके पर मंदिर के पुजारी ठाकुरदासजी, यज्ञाचार्य प्रमोद लिटौरिया, समिति के अध्यक्ष राजबहादुर श्रीवास्तव, डीके तिवारी, हरनाम सिंह तोमर, रमेश सिंह, भरत पुरोहित, जगदीश प्रसाद तिवारी, रामचरण तिवारी, प्रताप नारायण गुप्ता, रमेश नगाइच, भगवत कुशवाहा, रघुवीर शरण, सत्यनारायण विश्वकर्मा, चुन्नीलाल साहू, सतीश परिहार, नीरज तिवारी, देवेंद्र निरंजन, कृष्णकांत साहू, मीडिया प्रभारी आशीष तिवारी, आकाश सेन, आलोक खरे, मनोज साहू, राजकुमार साहू, पंकज तिवारी, कुंजबिहारी, महेश सेन, रमेश सोनी, महेंद्र सिंदवाहा, छक्कीलाल साहू, रामकुमार नामदेव, हर्ष नामदेव, अभिषेक यादव, अजय राजपूत, राजेश यादव, विजय झा, राहुल साहू, राजेंद्र यादव, दीपक यादव, दिनेश श्रीवास्तव, गोविन्द नारायन कुशवाहा, प्रेमनारायण कुशवाहा, ब्रजनारायन कुशवाहा, मुनिराज कुशवाहा, राहुल कुशवाहा, शिवा कुशवाहा, चक्रेश कुशवाहा, रोहित कुशवाहा, पेरिस कुशवाहा, डालचंद कुशवाहा, आकाश कुशवाहा, विशाल कुशवाहा, लक्ष्मी सतभैया, पंकज सतभैया, कृष्णा सतभैया, उर्मी सतभैया के अलावा अनेकों लोग मौजूद रहे।

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