इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र
दस्तक अभियान में चिन्हित 58 में से 49 बच्चों को एनआरसी में कराया संदर्भित
ललितपुर। कुपोषण और बीमारी एक दूसरे के पूरक हैं। डायरिया,निमोनिया एवं अन्य संक्रमण शरीर में कुपोषण उत्पन्न करते हैं। कुपोषण के कारण बच्चों का विकास व उनकी वृद्धि प्रभावित होती है। इस विषम स्थिति से बच्चों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर बाल विकास विभाग काम कर रहा है। पिछले दिनों दस्तक अभियान में चिन्हित हुए 58 में से 49 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में संदर्भित कराया गया। यह कहना हैजिला कार्यक्रम अधिकारी नीरज सिंह का। उन्होंने बताया कि शेष बच्चों को दवाएं देकर उपचारित किया गया है। गांववार कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उनके कुपोषण को दूर करने एवं सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनायें उन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की होती हैढ्ढ कुपोषित,अति कुपोषित एवं कम वजनबच्चों की पहचान उनके प्रबंधन और पोषण ट्रैकर का प्रशिक्षण आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को ब्लाक स्तर पर पहले ही दिया जा चुका है। इसके अलावा इन्फेन्टोमीटर, स्टेडियोमीटर (लम्बाई और वजन) मशीन द्वारा अतिकुपोषितबच्चों की पहचान,प्रबंधन व पोषण ट्रैकर में पंजीकृत करने तथा अतिकुपोषितबच्चों को उपचार हेतु एनआरसी पर संदर्भन करने,उपचार प्राप्त बच्चों का फॉलोअप करने के लिए आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ जे एस बक्शी ने बताया कि बच्चों में कम से कम पांच साल की उम्र तक विकास करने की क्षमता एक जैसी होती है। यदि बच्चा कुपोषित है तो वह अपनी उम्र के अन्य सामान्य एवं स्वस्थ्य बच्चों की तुलना में कम विकास करते हैं। बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान की शुरुआत करनी चाहिए। इसी तरह छह माह तक केवल मां का दूध, छह माह के पश्चात ऊपरी पूरक आहार देने के साथ बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कराना चाहिए। विकासखंड बार के अंतर्गत ग्राम कैलोनी निवासिनी सुमन बताती है कि उनके तीन साल के बेटे सत्यम का पेट निकला हुआ है। इस समय उसका वजन 8.210 किलोग्राम है। बच्चे को चलने फिरने में भी दिक्कत है। मेडिकल कालेज झांसी इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं मिला। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक बच्चे का वजन नही कम होगा, उसे चलने फिरने में समस्या रहेगी। अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता के कहने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार स्थित एनआरसी में भर्ती कराया है। यहां डॉक्टर बच्चे के वजन कम करने पर काम कर रहे हैं। विकासखंड बिरधा अंतर्गत ग्राम खितवांस निवासिनी भागवती बताती हैं कि अभियान के दौरान उनकी ड़ेढ़ साल की बेटी नितिका को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया, जहाँ उसे खून की कमी बताते हुए एनआरसी में भर्ती की सलाह दी गयी थी। नितिका को सांस फूलने की समस्या हो रही है। खून की कमी होने पर दो बार ब्लड चढ़ाया गया, इससे खून बढ़कर 12 हो गया है। लेकिन अभी केवल दूध ही पी रही है और चीजे नहीं खा रही है। उसका अभी एनआरसी में इलाज चल रहा है।
बाल कुपोषण के कारण
लंबे समय तक पर्याप्त मात्रा में भोजन का न मिलना, बाल्यावस्था में उचित देखावल की कमी, बीमारियों का बार बार होना, शिशु आहार संबंधी अपर्याप्त जानकारी, खुले में शौच तथा दूषित पानी पीने से बचें।
पोषण के सूत्र
पहले 1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है इसलिए इस समय मां और बच्चे को सही पोषण और खास देखभाल की जरूरत है। आंगनबाड़ी से मिलने वाला पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन जैसी चीजें ना खिलाएं, इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। बच्चे को खाना खिलाने से पहले बच्चों के हाथों को साबुन और पानी से जरूर धोना चाहिए। व्यक्तिगत साफ सफाई, घर की सफाई व आहार की स्वच्छता का ध्यान रखें। डायरिया से बचाव के लिए हमेशा स्वच्छ पानी पीना चाहिए।

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