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अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ, उन्नाव के तत्वाधान में एक सेमिनार का आयोजन किया गया

Sunday, November 13, 2022

/ by Today Warta



मोहम्मद जमाल

उन्नाव।अल्लामा इक़बाल मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्म दिवस के अवसर पर  उर्दू डे  के रूप में मनाया जिसके क्रम में अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ, उन्नाव के तत्वाधान में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सामाज सेविका  ग़ौसिया ख़ान ने की। सेमिनार का शीर्षक था  जंगे आजादी में उर्दू ज़बान का किरदार जिसके अंतर्गत वक्ताओं ने जंगे आज़ादी में उर्दू भाषा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला 

 उर्दू भाषा को साझा संस्कृति और मेल- मिलाप की भाषा बताते हुए उसके विकास को महत्वपूर्ण बताया। अध्यक्षा  ग़ौसिया ख़ान ने कहा कि उर्दू भाषा भारत में जन्मी भाषा है महाभारत जैसा ग्रन्थ  का उर्दू में लिखा गया था उर्दू भाषा में आज़ादी की लड़ाई में  लेखकों व शायरों के माध्यम से अंग्रेजों के विरुद्ध जनचेतना पैदा करने में महती भूमिका निभाई । भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनातये जाने वाले राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु महिलाओं को विशेष रूप से अपनी भूमिका निभाने आह्वान किया, उन्होंने कहा की 1 माॅं 100 शिक्षकों से बेहतर है इसलिए हमारी बहनों को भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा न केवल एक भाषा है बल्कि एक संस्कृति है। वक्ता गिरिजेश पांडे ने उर्दू भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ताओं में अली मेहंदी, नदीम हैदर एडवोकेट ,अफ़ज़ाल अहमद, संजय कुमार कनौजिया , प्रांतीय कोषाध्यक्ष ,उत्तर प्रदेश जूनियर शिक्षक  संघ आदि ने आज़ादी की लड़ाई में उर्दू की भूमिका पर उस समय के शायरों के शेरों को संदर्भित करते हुए अपनी बात कही। अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री व ज़िलाध्यक्ष  मोहम्मद हारून ने अपने भाषण में आज़ादी की लड़ाई में उर्दू भाषा के किरदार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अपनी बात कही उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल के शेरों का हवाला देते हुए यह कहने का प्रयास किया की उर्दू केवल मुसलमानों की भाषा नहीं बल्कि सभी हिंदुस्तानियों की भाषा है ,उन्होंने प्रसाद बिस्मिल के बहुत शेर पढ़े जिसमें मुख्य रुप से  

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 सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

 देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए क़ातिल में है  इंक़लाब जिंदाबाद  का नारा मौलाना हसरत मोहनी ने देकर आज़ादी के मतवालों को विशेष ऊर्जा प्रदान की। संयोग से उनका संबंध उन्नाव ज़िले से ही है। कार्यक्रम का संचालन संगठन के संरक्षक  अनवर अशहद जी ने अत्यंत ही प्रभावशाली ढंग से किया। परंपरा के अनुसार इस वर्ष 2 शाययरों जिसमें जवाहर उन्नावी और रियाज़ सफ़ीपुरी को संगठन के द्वारा स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में फैज़ हसन जिला संवाददाता दैनिक उर्दू इंकलाब और मो जमाल ब्यूरो चीफ़  दैनिक राष्ट्रीय जजमेंट को सम्मानित किया गया। 

 अंत में प्रादेशिक महामंत्री मोहम्मद हारून ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा की इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों में रईस सिद्दीक़ी, मोहम्मद फ़िरदौस रिज़वान सिराज शराफ़त ख़ान व मुबारक रज़ा ,शफी आरिफ़, नादरा, रुख़साना फ़रजाना,अज़रा, रेहाना ज़ाहिद आदि अंत तक उपस्थित रहकर सेमिनार को सफल बनाया।

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