राकेश केसरी
कौशाम्बी। मसालों की बढ़ती कीमतों ने व्यंजनों का जायका बेस्वाद व फीका कर दिया है। मसालों के दामों में आए भारी उछाल से कारोबारी हैरत में हैं। उनका कहना है कि लागत बहुत बढ़ गई है और मुनाफा नाममात्र रह गया है। सहालगों का मौसम चल रहा है। शादी की दावत करने के लिए खरीददारी करने में जुटे लोग जब किराना मंडी पहुंचते हैं, लेकिन विभिन्न मसालों के दाम सुनकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं क्योंकि जितनी तेजी मसालों पर आई है, उतनी अन्य किराना जिंसों पर नहीं। वैसे महंगाई की मार तो सभी प्रकार के खाद्य पदार्थो पर है लेकिन मसालों की कीमतें नई ऊंचाइयां छू रही हैं। महंगाई की यही रफ्तार रही तो लोग मसालों का स्वाद ही भूल जाएंगे। किराना कारोबारी शिवशंकर केशरवानी कहते हैं कि लालमिर्च इलायची, दालचीनी, जावित्री, जायफल, काली मिर्च आदि के दामों में इतनी तेजी तो कभी आई ही नहीं। वह इसका कारण वायदा कारोबार को मानते हैं। उनका कहना है कि जिन वस्तुओं पर भी वायदा कारोबार बढ़ता है तो वे महंगी होने लगती हैं। सिराथू मंडी में मसालों के थोक व फुटकर कारोबारी जयप्रकाश बताते हैं कि लागत इतनी अधिक बढ़ गई है कि मसालों की सभी जिंसों का स्टाक रखने में भारी लागत खर्च हो रही है और महंगाई की वजह से बिक्री घटकर आधे से भी कम रह गई है।

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