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मरीजों से सीएचसी में हो रहा दुर्व्यवहार

Friday, November 18, 2022

/ by Today Warta



राकेश केशरी

कौशाम्बी। सिराथू कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों से दुर्व्यवहार की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। ऐसा क्यों किया जा रहा है,इसको लेकर भी तमाम तरह की चचार्एं हैं। कभी वसूली की बात सामने आती है तो कभी मरीजों को अस्पताल से बाहर दूसरे निजी नर्सिगहोम में भेज देने जैसी चर्चा रहती है। सिराथू सीएचसी में इलाज कराने से अब मरीज कतराने लगे हैं। मरीजों से अभद्रता होने के कारण लोग यहां आने में संकोच कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऐसा जानबूझ कर किया जाता है। सबसे ज्यादा मरीजों को नर्से परेशान करती हैं। प्रसव के दौरान यह स्थिति बद से बदतर हो जाती है। कई बार मारपीट की नौबत बन चुकी है। इसके पहले भी इस अस्पताल में कई मर्तबा हंगामा हो चुका है। इससे अस्पताल के जिम्मेदारों पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। वसूली का आरोप लगता रहा है। वहीं निजी नर्सिगहोमों में भी अस्पताल भेजने का आरोप लग रहा है। इस बाबत जब मुख्य चिकित्साधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहं

होमियोपैथी को दवाओ का कम मिलता है बजट,मर्ज भगाने की कीमत अठन्नी भर

राकेश केशरी

कौशाम्बी। अस्पताल है, डाक्टर है, मरीज भी है लेकिन दवाएं नाममात्र की है। हर साल तीन लाख मरीज आते हैं पर देने के लिए दवा होती सिर्फ डेढ़ लाख की। ये हालात हैं होम्योपैथी चिकित्सा के। वहीं एलोपैथी चिकित्सा के बजट करोड़ों में है। जिला अस्पताल के लिए ही एक करोड़ से अधिक की दवा खरीदी जाती है, और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों के लिए दो करोड़ की। यह दर्द यहीं कम नहीं होता है। होम्योपैथी से इलाज करने वालों को वेतन के लिए तीन से चार महीने तक इंतजार करना पड़ता है। जिले भर में होम्योपैथी के आंठ चिकित्सालय हैं। इसमें से जिला अस्पताल, मंझनपुर, में हैं। इसके अलावा सात ग्रामीण क्षेत्रों में है। चूंकि विभाग में सालों से भर्ती नहीं हुई और धीरे-धीरे कई चिकित्सक रिटायर हो गये। इसलिए चार अस्पताल बिना डॉक्टर के हैं। विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि उनके अस्पताल में हर साल करीब तीन लाख मरीज आते हैं। औसतन हर महीने तीस से पैतीस हजार मरीज दवा के लिए आते हैं। मरीजों की इतनी बड़ी फौज को दवा देने के लिए विभाग को 2022-23 में दो लाख रुपया मिला है। इससे उन्हें हर मरीज को दवा देनी है, सो प्रति मरीज को पचास पैसे की दवा दी जाती है। जिला होम्योपैथी अधिकारी ने बताया बजट कम होने से मरीजों को सिरप या अच्छी दवाएं नहीं दे पाते हैं। कम पैसे में जितनी दवाएं मिलती हैं वही बांटते हैं। यह शिकायत संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 




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