राकेश केसरी
कौशाम्बी। किसान का जितना ध्यान फसल उत्पादन पर रहता है, उतना ही यदि वह खाद्यान्न भण्डारण पर दे, तो पैदावार के दस से 12 फीसदी भाग को नुकसान को बचाया जा सकता है। पैदावार को चूहों, कीटों, फफूंद व नमी की भेंट चढने से बचाने के लिए जरुरत है,उसके भण्डारण पर विशेष ध्यान देने की। रबी की फसल तैयार है। किसान गेहूँ आदि को बाजार में बेचने एवं अपने परिवार के खाने व बीज के लिए सुरक्षित रखने के लिए भण्डारण की तैयारी कर रहा है, किन्तु जरा सी लापरवाही इस पर पानी फेर सकती है। भण्डारण के पूर्व किसानों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अनाज पूरी तरह से सूखा हुआ है। भण्डारण से पूर्व भण्डार गृह की सफाई व चूना आदि से पुताई करना भी अति आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार भण्डारण स्थल को कीट रहित करने के लिए .5 प्रतिशत मैलाथियान के घोल अर्थात एक भाग दवाई और उसके सौ भाग पानी को फर्श, दीवारों व छत पर छिड़काव किया जाना चाहिए। इसके बाद एल्युमीनियम फॉस्फाइड की 7 से दस गोलिया दस घन फुट अर्थात 28 मीटर की दर से अनाज की कोठियों या गोदामों में प्रयोग करे। गोलिया डालने के बाद भण्डार गृह को 7 दिन तक पूर्ण रुप से हवा बन्द रखें। अगर अनाज को बोरियों में सुरक्षित रखना है, तो बोरियों को सीधे जमीन व दीवार से सटा कर नहीं, बल्कि उन्हे लकड़ी के तख्तों व बास की चटाई पर रखें। जहा तक सम्भव हो, अनाज का भण्डारण धातु की बनी टकियों अर्थात बखारी में करे। खाने के लिए रखे अनाज के कीड़ों को मारने के लिए एल्युमीनियम फॉस्फाइड अर्थात सल्फास का प्रयोग करना चाहिए तथा इसकी एक गोली दस क्विंटल अनाज के हिसाब से 2 या 3 फीट गहराई पर रखें, क्योकि इससे निकलने वाली गैस हवा से भारी होती है जो कि ऊपर से नीचे की ओर जाती है और कीड़ो को मार देती है। बीज हेतु रखे गए अनाज को कीड़ों से बचाने के लिए ढाई सौ ग्राम मैलाथियान प्रति हेक्टेयर की दर से मिला कर रखें, लेकिन ऐसे आनाज को कभी भी खाने या पशुओं के चारे के लिए काम में नहीं लेना चाहिए। कीटों के आक्रमण का पता समय रहते लग सके, इसके लिए गोदामों में आनाज को 15 दिन के अन्तर पर नियमित रुप से देखते रहना चाहिऐं।

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