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गजब: छप्पर नुमा यूनानी अस्पताल में लग रही मरीजों की भीड़

Friday, December 30, 2022

/ by Today Warta


राकेश केसरी

अस्पताल में न दवाइयों के रखने की जगह और न मरीजों के बैठने की व्यवस्था वार्ड ब्वाय ही देखता है मरीज, कभी कभार बैठते हैं डॉक्टर, अनदेखी

चायल,कौशाम्बी। स्थानीय कस्बे में अंग्रेजों के जमाने से से संचालित होने वाला यूनानी अस्पताल भी गजब का है। न बिल्डिंग, न लैब और न ही नियमित डॉक्टर, फिर भी अस्पताल में तैनात वार्ड ब्वाय प्रतिदिन सौ से लेकर डेढ़ सौ मरीजों की जांच कर उन्हे दवाएं दे रहा है। बात तो यह है कि यहां इलाज कराने के लिए मरीजों की लाइन भी लगती है। जबकि अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए ने तो कोई व्यवस्था है और न ही दवाओं को रखने के लिए कोई जगह। छप्पर नुमा दो कमरे में संचलित होने वाला यह अस्पताल लोगों के लिए मजाक बना हुआ है। शुक्रवार को भी अस्पताल में अकेले वार्ड ब्वाय ही मरीजों का इलाज करता हुआ मिला। डॉक्टर गायब मिले। चायल कस्बे में संचालित होने वाला यूनानी अस्पताल के स्थापना अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1906 में हुई थी। तब से इस अस्पताल में एक डॉक्टर, एक कंपाउंडर और एक विद ब्वाय की तैनाती दी गई है। अब इस अस्पताल की हालत जर्जर है। दो कमरे हैं जो जर्जर है। इन्हीं दो कमरों में से एक में डॉक्टर और वार्ड ब्वाय बैठते है जबकि दूसरे में ताला लगा हुआ है। बरामदे में अस्पताल को मिलने वाली दवाएं रखी हुई है। प्रतिदिन सुबह दस बजे तक इलाज कराने वाले मरीजों आ जाते है। अस्पताल में जगह नहीं होने के कारण वह बरामदे में ही खड़े हो जाते है। इसके बाद वार्ड ब्वाय बारी बारी से मरीजों को कमरे में बुला कर दवा इलाज करता है। शुक्रवार को भी अस्पताल में ऐसी ही स्थिति रही। डॉक्टर फरीद अहमद छुट्टी पर थे। इस दौरान वार्ड ब्वाय ने ही सभी की जांच कर दवाएं दिया है। वार्ड ब्वाय अब्दुल अजीज ने बताया कि प्रतिद्न वह सौ से लेकर डेढ़ सौर मरीजों का इलाज करते है। इस टूटे फूटे अस्पताल में सुविधाएं नहीं है तक क्या हुआ लेकिन यहां मरीजों की भीड़ लगती है। अस्पताल के लिए कस्बे में जमीन चिन्हित कर ली गई है जल्द ही नई जगह पर यूनानी का नया अस्पताल बन कर तैयार हो जाएगा। चायल खास के हबीब अहमद का कहना है कि यूनानी पद्धति से बीमारियों का बेहतर इलाज होता है। लेकिन चायल के यूनानी अस्पताल के खुद इलाज की जरूरत है। खपरैल नुमा इस अस्पताल में मरीज, डॉक्टर और स्टाफ को बराबर खतरा बना रहता है। वही चायल खास के ही महेश यादव कहते है कि अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर और कर्मचारियों की जरूरत होती है। लेकिन यहां पर तैनात डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। वार्ड ब्वाय ही मरीजों का इलाज करते है। इस अस्पताल में एक डॉक्टर, कंपाउंडर और एक वार्ड ब्वाय की तैनाती है। लेकिन वार्ड ब्वाय ही अस्पताल का सब कुछ है। कस्बे के ही अब्दुल अव्वल कहते है कि चायल कस्बे का यूनानी अस्पताल अपने आप में एक पहचान है। लेकिन अनदेखी के कारण इस अस्पताल का अब अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। इस यूनानी अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत है। कस्बे के ही अब्दुल अजीज का कहना है कि अस्पताल में दवाओं को रखने के लिए भी जगह नहीं है। हम लोग अपने निजी खर्चे से अस्पताल की रंगाई पुताई कराते है। प्रत्येक वर्ष छप्पर को बनवाया जाता है ताकि अंदर बरसात का पानी न भरे। जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इस अस्पताल को फूटी कौड़ी भी नहीं मिलती है। चचैली के शैलेश सिंह बताते है कि हम लोग यूनानी पद्धति से इलाज कराने में विश्वास करते हैं। लेकिन इलाज कराए भी टी कैसे। चायल के इस अस्पताल को देख कर ऐसा लगता है कि इस अस्पताल को खुद ही इलाज की सख्त जरूरत है।


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