राकेश केसरी
कार्यक्रम में बतौरमुख्य अतिथि शामिल हुए ईरान के मौलाना, फारसी में तकरीर कर गिनाइ बीबी फात्मा की खुसूसियत
सरायअकिल,कौशाम्बी। अय्यामे फातमिया के सिलसिले की अंतिम मजलिस कस्बे के चमनगंज वार्ड स्थित फाटक के शाहे वेलायत इमामबाड़े में हुई। इसकी शुरूआत तेलावत से की गई। मजलिस में बतौर मुख्य अतिथि मौलाना जवाद हुसैनी नजफ ने फारसी में तकरीर कर बीबी फात्मा की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम शाम सात बजे शुरू हो कर देर रात तक चला। वृहस्पतिवार को कस्बे के चमनगंज वार्ड स्थित शाहे वेलायत इमामबाड़ा में अय्यामे फातमिया की आखिरी मजलिस आयोजित की गई। मजलिस को मौलाना सयैद शमीमुल हसन बनारस ने खेताब किया। उन्होंने बीबी फात्मा जहरा के फजायल बयान करते हुए कहा कि जिस तरह अल्लाह ने एक लाख पैगम्बर भेजे दुनिया में अपने पैगाम को पहुंचाने के लिए उसी प्रकार अल्लाह ने बीबी फात्मा को भी महिलाओं के बीच पैगाम पहुंचाने के लिए भेजा था। मजलिस के बाद ईरान से आये मौलाना जवाद हुसैनी नजफ ने फारसी में तकरीर कर बीबी फात्मा की जीवनी पर विस्तार से चर्चा की। तकरीर के इसका उर्दू अनुवाद मौलाना तकी नकवी ने किया। अंत मे मौलाना सयैद जमीर हैदर रिजवी ने ज्यारत पढ़ाकर कार्यक्रम को समाप्त किया। कार्यक्रम का संचालन नैयर रिजवी ने किया। इस अवसर पर महशर रिजवी, एसएम महदी, शराफत हुसैन और कौनैन, सारिक रिजवी, फुरकान रिजवी, मजलिसी रिजवी, मो. फाते आदि लोग मौजूद रहे।

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