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पुण्यात्मा ही जिनालयों के समीप बसते हैं : श्रमण समत्वसागर महाराज

Thursday, December 8, 2022

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र

धर्म- नगरी मड़ावरा में सात मुनिराजों की भव्य अगवानी हुई 

जहां भक्तों की भक्ति होती है वहाँ संतों का समागम होता है : सुप्रभसागर 

मड़ावरा/ललितपुर। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज ससंघ, मुनि श्री समत्व सागर जी ससंघ सहित सात दिगम्बर मुनिराज  पद विहार करते हुए मड़ावरा पहुँचे।मड़ावरा पहुँचने पर नगर सीमा पर गाजे -बाजे के साथ भव्य अगुवानी श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भक्ति के साथ की। रास्ते में श्रद्धालु जयकारा करते हुए चल रहे थे।  जैन समाज द्वारा मुनिद्व्य का पाद प्रक्षालन व आरती उतार कर स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने इस दौरान अपने अपने दरवाजे पर भी पाद प्रक्षालन और आरती उतारी । मुनिश्री की अगवानी के लिए सुंदर रंगोली सजाई गई। उल्लेखनीय है कि मुनि संघ का पद विहार बानपुर से कारीटोरन के लिए चल रहा है।

इस मौके पर मुनि श्री समत्व सागर महाराज ने कहा कि पुण्यात्मा ही जिनालयों के समीप बसते हैं।

साधनों की सदुपयोग करने वाला ही भगवान बन सकता है। दूसरों के भीतर दोष खोजने वाला धर्मात्मा हो ही नहीं सकता। सम्यग्दर्शन को निर्दोष बनाना है तो आठ दोष छोड़कर आठ गुणों को प्राप्त करना आवश्यक है। कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी जरूरी है। जिसने आठ दोषों को खो दिया उन सिद्धोंने ही आठ गुणों का पाया है।

उन्होंने कहा कि मांगना अच्छा नहीं है लेकिन यदि मांगने की आदत ही पड़ चुकी है तो अपने घर में मांगों क्योंकि घर में मांगने से हकदार कहलाओगे और दूसरे के दरवाजे पर मांगने से भिखारी, निर्णय आपका।

इस अवसर पर मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज ने अपने संबोधन में श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जहां भक्तों की भक्ति होती है वहाँ संतों का समागम होता है । उन्होंने कहा कि पानी भी ढलान पर ही बहता है आपकी भक्ति का ही चमत्कार है कि बार बार मुनियों को मड़ावरा की धरती से गुजरना पड़ता है जो बीज पूर्व में बोए गए वह आज की आगवानी में फलता फूलता दिख गया।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन नहीं अंदर के दर्शन में जियो। अपने आत्म द्रव्य को पहचानो। दूसरों को नहीं स्वयं को देखो।रूप और स्वरूप में भेदभाव नहीं भेद विज्ञान करो।

आत्मा का कल्याण बुद्धि का मान करने से नहीं होगा , अधिक बुद्धिमान बनने से होगा।  निर्दोष श्रद्धा ही मोक्षमार्ग की पहली सीढ़ी है। उत्कृत लक्ष्य प्राप्त करने वाला जीव ही उत्तम-सुख को प्राप्त कर सकता है। छोटे- छोटे कार्यों से ही बड़ा बना जाता है बडे कार्य से कोई बड़ा नहीं होता।

इस अवसर पर स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, जैन 

समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल रहे।  मुनिश्री ससंघ श्री विद्या विहार वर्णी नगर मड़ावरा में विराजमान हैं।

अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में 13 से 17 दिसम्बर तक होगा पंचकल्याणक महोत्सव :

मड़ावरा विकासखंड में स्थित अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में मुनिश्री ससंघ के सान्निध्य में 13 से 17 दिसम्बर तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 

आयोजित किया जाएगा।

11व 12 दिसम्बर में विद्वत संगोष्ठी मुनि श्री सुप्रभसागर जी की नवोदित कृति 'सु-प्रवचन पर्व'  पर होगी। इस मौके पर कारीटोरन पंचकल्याणक समिति ने सप्त मुनिराजों से पंचकल्याणक हेतु निवेदन किया, श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद लिया।

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