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अलाव की गैस से फेफड़े, आंख दोनों को नुकसान

Wednesday, December 21, 2022

/ by Today Warta




राकेश केसरी

बरतें सावधानी 

बंद कमरे में अंगीठी, कोयला व हीटर का प्रयोग खतरनाक

अलाव से निकलती है जहरीली गैस कार्बन मोनोऑक्साइड

कौशाम्बी ।ठण्ड से बचने के लिए अलाव, हीटर व ब्लोअर आदि का सहारा लेने वाले सावधान ! बंद कमरे में इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस आपकी सांस भी रोक सकती है। इसलिए जब भी अलाव, हीटर व ब्लोअर आदि का उपयोग करें कमरा पूरी तरह से बंद नहीं करें। इससे निकलने वाली गैस तत्काल बाहर निकलते रहने दें। इससे आपको सर्दी भी नहीं लगेगी और इससे निकलने वाली गैस आपके फेफड़े और आंखों को भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी एवं उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ यश अग्रवाल ने बताया कि अलाव में कोयला, लकड़ी और केरोसिन के जलने से कॉर्बन मोनोऑक्साइड व अन्य कई जहरीली गैस निकलती है। यह गैस इंसानी फेफड़े के लिए स्लो-प्वाइजन की तरह है। यह फेफड़ों के साथ आंखों को भी नुकसान पहुंचती है। जानकारी व जागरूकता के अभाव में यह साइलेंट किलर हाइपोक्सिया मौत के मुंह में ढकेल रहा है। उन्होंने बताया कि कार्बन-मोनोऑक्साइड गैस केरोसिन, कोयला व लकड़ी के जलने पर ज्यादा मात्रा में निकलती है। जो ऑक्सीजन को बंद कमरे से रिप्लेस कर देती है। इससे कमरे में कार्बन-मोनोऑक्साइड गैस की मात्रा बढ़ जाती है। यह गैस फिर सांस के जरिए व्यक्ति के फेफड़े में पहुंचता है।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर से संक्रमित हुए लोग व जो व्यक्ति फेफड़े व सांस की बीमारी से गुजर रहे हैंव जिन्हें ब्लडप्रेशर व एनीमिया है उनके लिए बंद कमरे में अलाव का प्रयोग ज्यादा खतरनाक है। साथ ही बुजुर्गों, बच्चों व गर्भवती के साथ टीबी मरीजों की व निमोनिया, सायनस के मरीजों कि प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। इन लोगों के लिए भी बंद कमरे में अलाव का प्रयोग खतरे की घंटी है। गर्भ में पल रहा शिशु व माँ दोनों के लिए बंद कमरे में अलाव का प्रयोग खतरनाक है। बच्चे वयस्कों की तुलना में अधिक जल्दी सांस लेते हैं। वृद्ध लोगों में भी इस गैस का जोखिम ज्यादा है। इसलिए बिना वेंटीलेशन के कमरे में यह लोग अलाव का प्रयोग न करें।

कमरे में अलाव जलाते समय रखें सावधानियाँ:

मुंह ढक कर न सोएं

जहां वेटिंलेशन नहीं है, वहां ख़तरा ज्यादा

कमरे में एक बाल्टी पानी खुला जरूर रखें

कमरा गर्म होने के बाद अंगीठी बुझाकर सोएं

सांस के मरीज कमरे में अलाव न जलाएं

नवजात के कमरे में अलाव बिलकुल न जलाएं

कोरोना से जंग जीत चुके व्यक्ति रहें सावधान

अलाव का प्रयोग करते समय खिड़की खोलकर रखें

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