देश

national

किसानों की फसल के दुश्मन बने छुट्टा मवेशी

Wednesday, December 21, 2022

/ by Today Warta



राकेश केसरी 

कौशाम्बी। का हो काका, अबई तक त घडरोजई उत्पात मचाए रहेन,अब त गाय,भईस अउर बछवन से फसल बचाउब आफत होई गवा बा। चना,मटर क त बचबई मुश्किल बा। केतना राखा जाइ, सब खाई जात हएन। नीलगायों के साथ छुट्टा मवेशियों द्वारा फसल को किए जा रहे नुकसान को लेकर खेत व खलिहानों में पहुंचे किसानों के बीच कुछ इसी तरह की चर्चा.परिचर्चा छाई रहती है। कारण है कि छुट्टा मवेशियों के आतंक से परेशान किसानों के लिए फ सल बचाना मुश्किल हो उठा है। गोवंश काटने या फिर अवैध बूचडखानों पर लगे प्रतिबंध के बाद छुट्टा मवेशियों के लिए कोई व्यवस्था न होने के चलते किसानों में असंतोष देखा जा रहा है। देखा जाय तो इन दिनों गांवों में छुट्टा मवेशियों की बाढ़ आ चुकी है। किसी गांव का कोई मुहल्ला ऐसा नहीं दिखाई पड़ता जहां चार.छह छुट्टा मवेशी टहलते न दिख रहे हों। जो महंगी लागत लगाकर तैयार की जा रही किसानों की फसल के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं साबित हो रहे हैं। हालांकि धान व गेहूं की फसल बहुतायत में बोए जाने के चलते किसान उसका नुकसान तो सह लेते हैं लेकिन दलहन. तिलहन व सब्जियों आदि की फसल कम होने से उसका नुकसान किसानों के लिए असहनीय हो जा रहा है। ऐसे में किसान दलहन.तिलहन फसल की बोआई करने से कतराने लगे हैं।

दुग्ध उत्पादन बंद होते ही छोड़ दिए जा रहे मवेशी

दुग्ध उत्पादन बंद होते ही पशुपालक पशुओं को रखना नहीं चाह रहे हैं। विशेषकर बछड़े को तो जैसे ही गाय ने दूध देना छोड़ा लोग इधर.उधर कहीं ले जाकर बछड़े को छोड़ दे रहे हैं। बूचडखानों पर लगे प्रतिबंध के बाद कमोवेश यही दशा अब महिषवंशीय,भैंस.पड़वा, की भी होने लगी है। ऐसी भैंस जो चार छह बच्चे दे चुकी है व पड़वा तक को लोग नहीं रखना चाह रहे हैं। वह मौका देख उसे यहां.वहां ले जाकर छोड़ दे रहे हैं, जो किसानों की फसल के दुश्मन बन रहे हैं। किसानों का कहना है कि छुट्टा मवेशियों के लिए शासन को कोई व्यवस्था करनी चाहिए।

खेत में छुट्टा पशु व गांव में बंदरो का आतंक

एक तरफ  छुट्टा पशुओं द्वारा खेत में लगी खड़ी फसल को चरकर बर्बाद कर दिया जा रहा है,तो दूसरी तरफ  बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदर पेड़ पौधों सहित डिश एन्टीना से लगायत पानी की टंकियों को तोड़ कर नष्ट कर रहे हैं। सबसे अधिक नुकसान गांव के खपरैल के मकानों एवं झोपडियों को हो रहा है। इनको बंदर उजाड़ दे रहे हैं । तीन माह से क्षेत्र के आधा दर्जन गांव शमसाबाद,मलाक पीजड़ी,बेला,फत्तेहपुर,तेरहरा,सरैय्या में डेरा जमाए लगभग सौ की संख्या में इन बंदरो से बच्चों तथा बुजुर्गो को काफी खतरा उत्पन्न हो गया है। अकेले आदमी को तो देखते ही बंदर काटने दौड़ पड़ते हैं। दूसरी तरफ  छह महीने से छुट्टा पशुओं द्वारा खड़ी फसलों को नष्ट किया जा रहा है। इनको रोकने के लिए ग्रामीण रात.दिन खेत की रखवाली कर रहे हैं। बंदर व जानवरों से बचाव करने को लेकर किसान व ग्रामीण परेशान हैं।




Don't Miss
© all rights reserved
Managed by 'Todat Warta'