राकेश केशरी
कौशाम्बी। निजी अस्पताल संचालको के विषय में यह कह लिया जाए कि इलाज को लेकर निजी नर्सिंग होमों में ठगी का बड़ा आलम है,तो शायद यह गलत नहीं होगा। अकेले चायल क्षेत्र की बात करें तो सैकड़ों से अधिक नर्सिंग होम संचालित हैं। वह बात अलग है कि रजिस्ट्रेशन सीएमओ कार्यालय से है या फिर नहीं, और है भी तो क्लीनिक मतलब पूछताछ केंद्र का, या फिर पॉली क्लीनिक का या फिर नर्सिंग होम का, लेकिन कुछ भी हो रजिस्ट्रेशन के विषय में जिले का विभाग कितना जांच पड़ताल करता है यह तो नहीं स्पष्ट किया जा सकता, लेकिन इतना जरूर है कि इन अस्पतालों के बाहर लगे बोर्ड जरूर मरीज के तीमारदारों को इंट्री लेने के लिए विवश कर देते हैं। वह बात अलग है कि बोर्ड में लिखे डाक्टर साहब अंदर मिलेंगे या फिर वह सिर्फ बोर्ड तक में ही सीमित है और इलाज कोई झोलाछाप जैसा ही करेगा। खैर यह सब किसके रहमो करम पर हो रहा है, यह जांच का बड़ा विषय है। तिल्हापुर मोड़ स्थित राज हॉस्पिटल में मंगलवार को पिपरहाई निवासिनी डिंपल पत्नी कृष्णा सिंह को प्रसव पीड़ा होने के दौरान तिल्हापुर मोड़ राज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया,जहां पर उसको नॉर्मल डिलीवरी का झांसा देकर डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया,महिला की नार्मल डिलीवरी कराने के दौरान बच्चे की मौत हो गई और महिला की हालत गंभीर बनी हुई,महिला के परिजनों ने हंगामा करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही के वजह से बच्चे की मौत हो गई। क्षेत्र की चचार्ओं पर जाएं तो अस्पताल के बाहर लगे बोर्ड में भी उन्हीं बड़े साहब का नाम भी लिखा मिलेगा, लेकिन अंदर का रहस्य आपको तब पता चलेगा जब आप अपने गंभीर मरीज को इलाज के लिए भर्ती करा देंगे। फिर शुरू होगा धनादोहन अब यदि मरीज ठीक हो गया तो बेहतर है, और यदि गंभीर हो गया तो फिर आपको किसी और बड़ी अस्पताल का पता बता देंगे। इतना ही नहीं यदि आप उनके बताए गए अस्पताल में पहुंचे तो फिर वहाँ भी इनका कमीशन फाइनल हो गया। इस तरह से इलाज के नाम पर ज्यादातर निजी किया है। नर्सिंग होमों में ठगी का बड़ा आलम है सबसे बड़ी बात इन क्लीनिकों व नर्सिंग होमों में एनएम, जे एनएम का कोर्स करने वाली लड़कियों के भरोसे प्रसव एवं (एबार्शन) की जिम्मेदारी होती है। इसमें मोटी रकम की कमाई भी होती है। अब सवाल इस बात का उठ रहा है कि कमाई के बाद हिस्सा विभागीय बाबुओं व अफसरों को जाता है या फिर नहीं लेकिन जिस तरह से खुला ठगी का यह आलम चल रहा है और इनकी तरफ कोई जिम्मेदार कार्यवाही भरी निगाह से नहीं देख रहा, उससे इलाकाई बुद्धिजीवियों के जुबां में यह चर्चा जरूर सुनने को मिलती है। बहरहाल इसमें कितनी सच्चाई है यह तो अफसरों के जांच के बाद स्पष्ट होगा। लेकिन जिस तरह से तिल्हापुर मोड़ में इलाज के नाम पर ज्यादातर निजी अस्पतालों में ठगी का आलम है, उससे कहीं न कहीं गरीब जनता हैरान परेशान जरूर है। अब यदि क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों की मानें तो लोगों ने इस ओर जिलाधिकारी सुजीत कुमार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए संचालित निजी नर्सिंग होमों की हकीकत की जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कराए जाने की मांग की है।

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