इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र'
अभिनंदनोदय तीर्थ पर मुनि श्री ने किया धर्मसभा को सम्बोधन
ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में मुनि सुधासागर महाराज ने जीवन मे गुरू की संगति को पुण्य का कारण बताते हुए कहा कि गुरू संगति में स्वयं भगवान बनने की शक्ति मिलती है। उन्होने कहा प्रकृति ने दिया जो कुछ है देखने के लिए है, जो देखने लायक नहीं है उसे छिपकर देख रहे हो आखिर किस लिए। मुनि श्री ने श्रावकों को प्रेरणा दी कि जीवन में अच्छा सोचोगे और बुराईयों से दूर रहोगे आत्मिक शान्ति मिलेगी। मुनिश्री ने कहा धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है इसको समझो और अपने जीवन में उतारो यह नर जन्म मिला है जिसको सार्थक करो इसी में कल्याण है। इसके पूर्व सुबह मुनिश्री के सानिध्य में अभिनंदनोदय तीर्थ पर धर्मालुजनों ने अभिषेक शान्तिधारा का पुण्र्याजन किया। इसके उपरान्त धर्म सभा का शुभारम्भ आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीपप्रज्जवलित कर श्रावक श्रेष्ठियों ने पुण्र्याजन किया एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन किया।
मुनि विभंजनसागर महाराज का हुआ मिलन
आज अभिनंदनोदय तीर्थ पर गणाचार्य विरागसागर महाराज के शिष्य श्रमण मुनि विभंजन सागर महाराज ने निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज संघस्थ मुनि पूज्यसागर महाराज के दर्शन कर वात्सल्यमयी मिलन हुआ। इसके पूर्व मुनि श्री ने नवनिर्मित अभिनंदनोदय तीर्थ के दर्शन किए। मुनि श्री जैन अटामंदिर में विराजमान हैं जहां उन्हें प्रात:काल धर्मोपदेश हुए और उन्होने श्रावकों को धर्म का मर्म बताया।

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