देश

national

औरत हूं इसलिए समझती...

Thursday, January 19, 2023

/ by Today Warta



औरत हूं इसलिए समझती

 हूं उसके जज्बातों को

चलते जाना है मुझको 

मंजिल अपनी पाने को

जीवंत करना है सरल 

नहीं अनेकों किरदारों को

मिटने नहीं दूंगी मैं 

अपने अरमानों को

सभी पड़े हैं मेरे पीछे

 मेरा अस्तित्व मिटाने को 

औरत हूं इसलिए समझती 

हूं उसके जज्बातों को

कहीं सुरक्षित मै नहीं 

सब लगे हैं निशां मिटाने को

मेरा वजूद मुझको पता है

 डरती नहीं मैं हैवानो को

कुछ बुझदिलो  के कारण

क्यों मजबूर हुई मर जाने को

प्रेम में मुझको छला  गया

 क्यों सोची प्रीत निभाने को

औरत हूं इसलिए समझती 

हूं उसके जज्बातों को

यहां सभी है छद्मवेश में 

मासूम बाला को फंसाने कोई 

खुद को मजबूत करो इतना

कि बुलाओ न मददगारों को

क्यों पहचान नहीं पाई

 प्रेम रूप गद्दारों को

सबक सिखाना है मुझको

अब इन प्रेम के सौदागरों को

औरत हूं इसलिए समझती हूं

उसके जज्बातों को

बहुरूपियो की इस दुनिया में

पहचानी नहीं शैतानों को

जीना है अब स्वाभिमान से

हरगिज़ नहीं शीश झुकाने को

बंधन मुक्त जीवन हो मेरा

चाह समानता पाने को

सवाल यही अब उठता है

क्या जन्म हुआ यूं मर जाने को

औरत हूं इसलिए समझती हूं

उसके जज्बातों को

सीमा त्रिपाठी

शिक्षिका साहित्यकार लेखिका

लालगंज प्रतापगढ़

Don't Miss
© all rights reserved
Managed by 'Todat Warta'