राकेश केशरी
कौशाम्बी। एक तरफ छुट्टा पशुओं द्वारा खेत में लगी खड़ी फसल को चरकर बर्बाद कर दिया जा रहा है,तो दूसरी तरफ बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदर पेड़ पौधों सहित डिश एन्टीना से लगायत पानी की टंकियों को तोड़ कर नष्ट कर रहे हैं। सबसे अधिक नुकसान गांव के खपरैल के मकानों एवं झोपडियों को हो रहा है। इनको बंदर उजाड़ दे रहे हैं। तीन वर्ष से क्षेत्र के आधा दर्जन गांव शमसाबाद, मलाक पीजड़ी,बेला,फत्तेहपुर,तेरहरा,सरैय्या में डेरा जमाए लगभग हजारो की संख्या में इन बंदरो से बच्चों तथा बुजुर्गो को काफी खतरा उत्पन्न हो गया है। अकेले आदमी को तो देखते ही बंदर काटने दौड़ पड़ते हैं। दूसरी तरफ छुट्टा पशुओं द्वारा खड़ी फसलों को नष्ट किया जा रहा है। इनको रोकने के लिए ग्रामीण रात.दिन खेत की रखवाली कर रहे हैं। बंदर व जानवरों से बचाव करने को लेकर किसान व ग्रामीण परेशान हैं।

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