यमुनानगर /प्रयागराज। तीसरी सरकार के नुमाइंदों द्वारा अजब गजब के हथकंडे अपनाए जाते हैं अमृत सरोवर में मनरेगा के तहत बन रहे रोड में हेरा फेरी का खेल कुछ ऐसा हुआ है जिसे सुनने के बाद अपने दांतो के नीचे अंगुलियां खुद-ब-खुद दबी रह जाएंगी। जी हां पूरा मामला है जनपद के यमुनानगर विकासखंड जसरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बैजला का। गरीब ग्रामीण मजदूरों ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे यहां मनरेगा के तहत काम पर ना जाने वाले पड़ोसी गांव के लोगों का नाम बिना काम किए मास्टर रोल में हाजिरी लग गई और भुगतान भी हो गया जबकि सच्चाई यह है कि हम लोगों ने पूरी लगन और मेहनत के साथ रोड में काम किया मगर हम लोगों को भुगतान नहीं मिला सक्षम अधिकारियों से फरियाद की यहां तक की 1076 पर भी शिकायत दर्ज करवाई गई मगर हीला हवाली कर बिना जांच किए रिपोर्ट लगा दी गई ग्राम प्रधान से जब मजदूरी के पैसे की मांग की जाती है तो प्रधान द्वारा धमकी दी जाती है कि जहां भी शिकायत करना है करो मेरा कोई बाल बांका नहीं कर सकता। यहां तक कि जब मूलभूत सुविधाओं की मांग की जाती है तो प्रधान द्वारा सुविधा शुल्क के नाम पर प्रति आवास 20 हजार रुपए की मांग की जाती है। मज़े कि बात तो यह है कि अपात्रों को आवास दे दिया गया पात्रों को वंचित कर दिया गया और दिव्यांग व्यक्ति से भी आवास देने के नाम पर प्रधान द्वारा मोटी रकम मांगी जाती है।आखिर सवाल यह उठता है कि जब शासन के द्वारा मूलभूत सुविधाएं दी जा रही है तो गरीब ग्रामीणों को वंचित क्यों होना पड़ रहा है जो जांच का विषय है।

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