राजीव कुमार जैन रानू
वर्तमान में 84 कुष्ठ रोगियों का चल रहा उपचार
ललितपुर। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए गए स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान में जनपद में चार नए कुष्ठ रोगी मिले हैं। इन मरीजों का निशुल्क इलाज शुरू कर दिया गया है। मरीजों के नियमित दवा के सेवन से कुष्ठ रोग के कीटाणु समाप्त हो जाते हैं। गत 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ दिवस पर स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान शुरू हुआ था, जो 13 फरवरी तक चला। सीएमओ डा.जे.एस.बक्शी ने कहा कि इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की खोज की। कुष्ठ रोग की दो श्रेणियां हैं। पोसी बैसीलरी (पीबी) श्रेणी में पांच से कम चकत्ते वाले मरीजों को रखा जाता है। इसका इलाज छह महीने तक होता है। मल्टी बैसीलरी (एमबी) श्रेणी के मरीजों के शरीर पर पांच या पांच से अधिक चकत्ते होते हैं। अभियान में 4 नए कुष्ठ मिले हैं। वर्तमान में जिले में 84 एक्टिव केस हैं। अप्रैल 2022 से अब तक 75 मरीज खोजे गए हैं। वही, 53 कुष्ठ रोगी रोगमुक्त हो चुके हैं। कुष्ठ रोग का इलाज सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है। किसी भी कुष्ठ रोगी से भेदभाव नही करना चाहिए।
जिला कुष्ठ अधिकारी डा.आर.एन.सोनी ने बताया कि कुष्ठ सामाजिक अभिशाप नहीं है। यह बीमारी इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाती है। कुष्ठ रोग छूने से नहीं बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने एवं थूकने से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसके बैक्टीरिया प्रवेश कर फैल जाता है। समय पर मल्टी ड्रग थेरेपी के उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है। सभी सरकारी चिकित्सालय में इसकी दवा उपलब्ध है। कुष्ठ रोगियों का नियमित इलाज होने के बाद रोग के कीटाणु समाप्त हो जाते हैं। उप जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डा. सौरभ सक्सेना ने बताया कि कुष्ठ रोग कोई कलंक नहीं है, बल्कि दीर्घकालीन संक्रामक रोग है, जो माइक्रोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है। यह हाथ-पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार शीघ्र न हो तो यह स्थाई विकलांगता का कारण बन जाता है। कुष्ठ रोगी से भेदभाव बिल्कुल न करें और न ही किसी प्रकार की अफवाह पर विश्वास करे।
कुष्ठ रोग के लक्षण
उप जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि लेप्रोसी या कुष्ठ के दौरान शरीर पर फीके या लाल या उभरे या सपाट दाग धब्बे उत्पन्न हो जाते हैं। नसों की खराबी एवम मोटा हो जाना, त्वचा की जांच में कुष्ठ रोग के जीवाणुओं का पाया जाना, यह कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह के निशान सुन्न होते हैं यानी इनमें किसी तरह की संवेदनाए नहीं होती है। यह पैच या धब्बे शरीर के किसी एक हिस्से पर होने शुरू हो सकते हैं, जो ठीक से इलाज न कराने पर पूरे शरीर में भी फैल सकते हैं।

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