राकेश केशरी
कौशाम्बी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय बनारस से सम्बद्ध सैनी का गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय इन दिनों प्रबंधक-प्राचार्य की रार में जंग का मैदान बना हुआ है। डिग्री कॉलेज परिसर में बच्चों की पढ़ाई-परीक्षा छोड़ बाकी सब कुछ रोज हो रहा है। 23 फरवरी से कॉलेज में मध्यमा-उतर मध्यमा की परीक्षा होनी है और प्रबंधक ने प्राचार्य व परीक्षा नियंत्रक कक्ष में ताला जड़ उसकी कुंडी पर लोहे की वेंडिंग करा दी है। इस विवाद के बीच प्रशासनिक अधिकारी मूक दर्शक बन हालात के तमाशबीन बने है। सिराथू तहसील के राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर स्थित गुरुकुल वैदिक संस्कृत महाविद्यालय मंडल का एकमात्र मध्यमा (हाईस्कूल) उत्तर-मध्यमा (इंटर), शास्त्री (स्नातक) व आचार्य (परास्नातक) की डिग्री देने वाला डिग्री कॉलेज है। इसकी स्थापना सन् 1956 में वैदिक संस्कृति व संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए की गई थी। डिग्री कॉलेज वैदिक शिक्षा समिति के सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के अनुसार संचालित होता है। कॉलेज में डिग्री हासिल करने वाले बच्चों को बनारस का सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय उपाधि देता है। इस लिहाज से संपूणार्नंद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर इसके कार्यपालक अधिकारी हैं। बावजूद इसके वर्ष 2018 में आर्य प्रतिलिपि सभा सोसाइटी के एक दस्तावेज के आधार पर दिलीप श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति ने डिग्री कॉलेज का खुद को प्रशासक बताते हुए प्रबंध तंत्र पर अपना कब्जा जमा लिया। जिसके बाद से उन्होंने रविवार को कालेज प्राचार्य के चेंबर में खुद का ताला लगाकर उस पर लोहे की वेंडिंग करा दी है। इतना ही नहीं, परीक्षा नियंत्रक के कक्ष में भी अपना ताला जड़ दिया है। प्रबंधक एवं प्राचार्य की रार में कॉलेज के कैंपस में रह रहे छात्रों ने कालेज परिसर छोड़ अपने घर चले गए हैं। प्रबंधक दिलीप श्रीवास्तव ने बताया कि कॉलेज में फर्जी दस्तावेज के आधार में कुलदीप नारायण ने प्राचार्य का पद हासिल कर लिया है। जिसके दस्तावेज उनके पास हैं। इसी तरह परीक्षा नियंत्रक खुद को बताने वाले मिनकेतन शास्त्री की भी नियुक्ति तत्कालीन प्रबंध तंत्र को गुमराह कर हुई है। ऐसे में उन्होंने अपना प्राचार्य अशफीर्लाल शास्त्री को नियुक्त कर परीक्षा संपन्न कराए जाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है। प्राचार्य कुलदीप नारायण ने बताया कि वर्ष 2018 के पहले पंचम लाल मौर्या प्रबंधक हुआ करते थे। वर्ष 2019 में दिलीप श्रीवास्तव ने कॉलेज की अरबों की भूमि के लालच में फर्जी दस्तावेज के जरिये खुद को प्रशासक नियुक्त कर कॉलेज पर कब्जा जमा लिया। प्रबंध समिति में अपने लोगो को रख कर कालेज की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। मौजूदा समय में दिलीप श्रीवास्तव प्रदेश के वैदिक संस्कृत विद्यालयों पर कब्जा जमा चुके हैं। चित्रकूट के राजापुर में उस पर एसडीएम ने विद्यालय पर अवैध कब्जा करने में केस दर्ज कराया है। शिक्षा माफिया दिलीप श्रीवास्तव के डिग्री कॉलेज को बचाने की कोशिश में वह अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी डिग्री कॉलेज में प्रशासनिक प्रशासक नियुक्त नहीं कर रहे हैं, जबकि संबद्ध यूनिवर्सिटी ने डीएम सुजीत कुमार को कॉलेज में प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी रखा है। डीआईओएस सच्चिदानंद यादव ने बताया, प्रकरण में जिलाधिकारी का एक पत्र प्राप्त हुआ है। वह अभी माध्यमिक परीक्षा कार्य में व्यस्त है। जल्द प्रकरण की सम्पूर्ण पत्रावली तलब कर मामले का प्रभावी निस्तारण कराया जायेगा।

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