राकेश केशरी
कौशांबी। उत्तर प्रदेश सरकार ढिंढोरा पीट रही है कि उत्तर प्रदेश में बहन बेटियां और गरीब असहाय को सताने वाले को सलाखों के पीछे भेजने का वादा कर रही है और बहुत से दबंगों को जेल के सलाखों के पीछे भेज भी दिया है लेकिन ताजा मामला चायल तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बदले (बड़े गांव) गांव निवासी इदरीस अहमद पुत्र सिद्दीक अहमद खाता संख्या 32 में गाटा संख्या 830 ग में जमीला बानो पत्नी सिद्दीक अहमद के नाम बेबैनामे के आधार पर खारिज व दाखिल हो चुकी है जो 1429 से 1434 फसली खाता संख्या 32 पर बैनामा दार का नाम दर्ज है जिस पर भुक्तभोगी ने मकान बनाकर रह रहा है उसके उत्तर आने जाने का रास्ता नफीस अहमद पुत्र नजीरूद्दीन द्वारा नाबदान का पानी एवं 3 फीट दीवाल उठाकर रास्ते को रोक दिया है ।भुक्तभोगी ने पुलिस प्रशासन और उप जिलाधिकारी चायल से गुहार लगाई ।उप जिलाधिकारी चायल ने 30 /12 /22 को ग्राम सभा के लेखपाल को आदेशित किया कि जांच करके उचित कार्रवाई करें लेखपाल ने उचित कार्रवाई न करके बल्कि आरोपियों से सांठगांठ कर उप जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखा दिया है जिससे भुक्तभोगी दर-दर की ठोकरें खा रहा है जबकि भुक्तभोगी को घर जाने के लिए और कोई दूसरा रास्ता नहीं है । ग्रामीणों का कहना है कि भुक्तभोगी का एकमात्र यही रास्ता है। अब सवाल उठता है की ग्रामीणों के बताने के अनुसार एक ही रास्ता है और आरोपी उस रास्ते पर नाबदान बहाकर उस पर 3 फुट की दीवार खड़ी कर दी है तो अब भुक्तभोगी कहां से आना जाना होगा क्या भुक्तभोगी के लिए कोई दूसरा रास्ता निकल सकता है यदि इस प्रकार के आदेशों को राजस्व ग्राम के लेखपाल आदेशों को ठेंगा दिखाकर आरोपियों से सांठगांठ करके आमजन को परेशान करेंगे तो आमजन का क्या होगा।

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