रावेंद्र शुक्ला
अखिल भारतीय सरदार पटेल सेवा संस्थान आलोपीबांग परिसर में गुरूवार को 09 दिवसीय विराट किसान मेला 2023 के द्वितीय दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कीं अध्यक्षता राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी मनोरमा दीदी द्वारा की गयी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्रह्मा कुमारी रेनू दीदी,, ब्रह्मा कुमार सतीश भाई, उप कृषि निदेशक, प्रयागराज, जिला कृषि अधिकारी, कृषि रक्षा अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी, डा0 अजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक के0वी0के0 नैनी, डा0 मुकेश पी0एम0 कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय नैनी उपस्थित रहे।
उप कृषि निदेशक, प्रयागराज द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए शास्वत यौगिक एवं प्राकृतिक खेती केे फायदे के बारे में विस्तृत चर्चा की गयी। प्राकृतिक खेती जो पहले हुआ करती थी उसमें जो पोषक तत्व, जीवांश कार्बन, लाभदायक जीव, मिट्टी में होते थे, उससे जो अन्न का उत्पादन होता था उसे खाने से व्यक्ति स्वस्थ्य रहते थे। आज के समय में रसायनों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही है। आज का किसान जहाॅं एक ओर खेती की लागत बढ़ने, उत्पादों का उचित मूल्य न मिलने प्राकृतिक प्रकोपों तथा मौसम के असामान्य उतार चढ़ाव से परेशान होकर आत्म हत्या कर रहे है वहीं दूसरी ओर अत्याधिक रसायनिक खादों तथा कीटनाशक जहर से तैयार अनाज, फल एवं सब्जियाॅं मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। अनेक प्रकार की बीमरियाॅं और रोग बढ़ते जा रहे हैं युवा पीढ़ी खेती करना नहीं चाहती। ग्रामीण युवा लक्ष्य विहीन जीवन से परेशन होकर नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे है, उसे अपना भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। जिस खेती को उत्तम कार्य कहा जाता रहा है अब किसानों को बोझ लग रही है, लोग इसे मजबूरी का कार्य समझने लगे हैं विकास की धुरी कमजोर होने लगी है। निश्चित रूप से यह गम्भीर समस्या है, जिसके समाधान की नितान्त आवश्यकता है। इसके लिये किसानों को इस कार्यक्रम के माध्यम से शाश्वत यौगिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शाश्वत यौगिक खेती वह परम्परागत खेती है जिसमें रसायिनक उर्वरक तथा कीटनाशक का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता बल्कि प्राकृतिक तरीको को अपनाया जाता है इसीलिये हम इस खेती को शाश्वत यौगिक खेती कहते हैं। इस खेती से किसान आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रुप से सशक्त बनते है। देशी गाय पालने एवं उनके महत्व के बारे में बताया गया कि गांय के एक ग्राम गोबर में 300-500 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु पाये जाते हैं गोबर में गुड़ एवं अन्य पदार्थ डालकर किण्वन से तैयार किया गया बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत इत्यादि जब खेत में पड़ता है तो करोड़ों सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा भूमि में पौधों के लिये भेजन का निर्माण होने लगता है और मृदा में सुधार होता है। मां गंगा के किनारे दोनों तरफ 5 किमी के गांवों में कृषि विभाग द्वारा संचालित नमामिगंगा योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इस योजना में उर्वरक एवं कीटनाशी मुक्त खेती का कार्य किया जा रहा है जिससे हमें जैविक उत्पाद प्राप्त हो रहा है जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद है। जैविक उत्पाद की बिक्री के लिये जैविक बाजार बनकर तैयार हो गया है जिसका संचालन शीघ्र ही प्रारम्भ होगा।
ब्रह्मा कुमारी रेनू दीदी द्वारा शाश्वत यौगिक खेती योजना नये युग के लिये नया कदम क्रियान्वित किये जाने के बारे में कृषकों को बताया गया तथा संस्था द्वारा गांवों में चलाये जा रहे कृषकों के लिये जागरुकता कार्यक्रम के बारे में चर्चा की गयी। ब्रह्मा कुमार सतीश भाई द्वारा बताया गया कि गोबर, गोमूत्र, धान की भूसी आदि से तैयार उत्पाद का यदि हम प्रयोग खेती में करते हैं तो हमारी मृदा का स्वास्थ्य ठीक हो सकता है। किसानों की कृषि में लागत कम हो सकती है और उत्पादन में वृद्धि सम्भव है। जी0सिंह डिग्री कालेज के छात्र द्वारा पौध नर्सरी तैयार करने के बारे में चर्चा करते हुए कि कृषकों को जानकारी दी गयी कि किसान भाई स्वयं पौध नर्सरी तैयार कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी मनोरमा दीदी द्वारा शास्वत यौगिक खेती के बारे में चर्चा की गयी। आज पूरे विश्व में अनाज की उत्पादकता को बढ़ाने के लिये, रासायनिक खाद और कीटनाशकों को अत्यधिक इस्तेमाल हो रहा है जिसके अनेकानेक दुष्परिणाम दिखाई दे रहे हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशक के अधिक प्रयोग से पर्यावरण का सन्तुलन बिगड़ता जा रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। अनाज की पौष्टिकता खत्म हो रही है, जमीन की ताकत कम हो रही है अनाज की पौष्टिकता कम होने और विषैले तत्व शरीर में आने के कारण शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति कम हो गई है और अनेक बीमारियाॅं बढ़ रही हैं। अन्न का मन पर प्रभाव पड़ता है और मन का स्वास्थ्य व रोगों से गहरा सम्बन्ध है ‘‘जैसा अन्न वैसा मन जैसा मन वैसा तन‘‘ इसलिय तनावमुक्त, जीवन जीने के लिये भोजन का अकथनीय महत्व है। सभी मनुष्यों का लक्ष्य यही है कि हम शान्त, शीतल और सात्विक वृत्ति को धारण कर सुखमय व आनन्दित जीवन जिये और इस लक्ष्य तक पहुुॅंचने के लिये मन को वश में करना आवश्यक है मन को वश में करने के लिये हमें अन्न की पर ध्यान देना जरुरी है।डा0 मुकेश पी0एम0, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वद्यिालय नैनी, द्वारा मृदा में जीवांश कार्बन के संरक्षण हेतु जानकारी दी गयी। इसके लिये ढैचा की बुवाई, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद, आदि के प्रयोग के बारे में कृषकों को प्रोत्साहित किया गया तथा मृदा की जाॅच कराते रहने के लिये कृषकों को सतर्क किया गया। डा0ॅ अजय कुमार कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र नैनी द्वारा कृषकों को उत्पादन लागत कम करने हेतु प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया गया। आज के कार्यक्रम में कृषि से संबंधित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा कृषकों की जानकारी के लिये 60 स्टाल लगाये गये तथा लगभग 1000 कृषकों द्वारा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक, प्रयागराज द्वारा ब्रह्मा कुमारी रेनू दीदी, राजयोगिनी ब्रह्मा कुमारी मनोरमा दीदी, ब्रह्मा कुमार सतीश भाई, द्वारा अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह् भेंट किया गया। जिला कृषि अधिकारी, प्रयागराज द्वारा उप कृषि निदेशक, प्रयागराज की अनुमति से कृषकों, अधिकारियों एवं मीडिया सेल को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गयी।

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