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पांच लाख से ज्यादा बच्चों को खिलाई जाएगी पेट के कीड़े निकालने की दवा

Thursday, February 9, 2023

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र

सीतापाठ रोड तालाबपुरा के एक विद्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्घाटन आज

ललितपुर। जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) कार्यक्रम के अंतर्गत एक से 19 वर्ष तक के बच्चों को पेट के कीड़े निकालने के लिए एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। 10 फरवरी को सुबह 10.30 बजे जिलाधिकारी द्वारा सीतापाठ रोड तालाबपुरा स्थित एक विद्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्घाटन किया जाएगा। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.जे.एस.बक्शी ने दी। सीएमओ ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों, निजी विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दवा खिलाई जाएगी। बच्चों के पेट में कीड़े होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है और शरीर कुपोषित हो सकता है। इससे संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास भी नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल के सेवन से कृमि संक्रमण से बचाव होता है। यह दवा पूर्ण सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। खाली पेट दवा नहीं खानी है। डिप्टी सीएमओ डा. अमित तिवारी ने बताया कि एक से दो साल के बच्चों को आधी टेबलेट का चूरा कर पानी के साथ खिलाया जाएगा। बड़े बच्चों को दवा चबा चबाकर खानी है। उन्होंने कहा कि बीमार बच्चे को कृमि मुक्ति की दवा नहीं खिलाई जाएगी। यदि किसी भी तरह उल्टी या मिचली महसूस होती है तो घबराने की जरूरत नहीं। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सरदर्द, उल्टी, मिचली, थकान होना या चक्कर आना महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब सही हो जाता है। आरबीएसके डीईआईसी मैनेजर डा.सुखदेव ने बताया कि एक से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए जिले में 5.97 लाख बच्चों को एल्बेंडाजोल खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग समेत आईसीडीएस और शिक्षा विभाग का भी सहयोग रहेगा। उन्होंने कहा कि यह गोली पूरी तरह से सुरक्षित है, किसी भी भ्रम में पडऩे की आवश्यकता नहीं है। जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक गणेश ने बताया कि 3,225 आशा व 1124 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व फ्रंट लाइन वर्करों की मदद से एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा घर-घर जाकर खिलाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी अभिभावक को यह टेबलेट रखने या बाद में खिलाने के लिए नहीं देनी है। यह दवा आशा व आगंनबाड़ी के सामने ही बच्चों को खिलानी है।

कृमि संक्रमण के लक्षण

बच्चों के शरीर में खून की कमी हो जाना। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो जाती है। थकान महसूस करते रहना। बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो जाता है।

कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय

घरों के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें। नाखून साफ और छोटे रखें। साफ और स्वच्छ पानी ही पियें। खाने को ढककर रखें। साफ पानी से फल व सब्जियों को धोए। खाने से पहले और सोच जाने के बाद अपने हाथ साबुन से धोएं। खुले में शौच न करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करे। जूते पहने, नंगे पैर न घूमे।

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