इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
सरकार मदीने में बुला क्यों नही लेते, कमली में गरीबों को छुपा क्यों नहीं लेते...
उर्स के दूसरे दिन सहरी तक जमी रही महफिल
ललितपुर। महान सूफी सन्त हजरत बाबा सदनशाह रहमतउल्लाह अलैह की दरगाह पर चल रहे सालाना उर्स इजलास के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सभी धर्म के श्रद्धालुओं ने बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाकर मन्नतें माँगी। मशहूर फनकार अनीस नबाब की कव्वालियों ने अपने फन का ऐसा जादू बिखेरा कि लोग झूमने पर मजबूर हो गए। श्रोता कव्वालियों का लुत्फ उठाते रहे। अजीम सूफी सन्त हजरत सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के सालाना उर्स के मौके पर शनिवार की रात मशहूर फनकार अनीस नबाब की महफिल सजी। उन्होंने रात से सहरी तक खुदा और नवी की शान व हुसैनी रंग से ख्वाजा व बाबा सदन की शान में मनकवत का दौर चला रात से सहरी तक अनीस नाबाब समाँ बांधे रहे। सबसे पहले उन्होंन खुदा की शान में नात ए हम्द पढ़ी। इसी दौरान नवी के मर्तबा को बताते हुये नाते पाक सरकार मदीने में बुला क्यों नही लेते, कमली में गरीबों को छुपा क्यों नहीं लेते, घटा छा सकती है लेकिन बराबर छा नहीं सकती, मोहम्मद के गुलामों पर मुसीबत आ नहीं सकती। आजा ख्वाजा की शान में तेरे दरबार से एक बार मदीना जाऊं, तू अगर दे दे मुझे इजाजत ख्वाजा, एक अदना को तुम सुल्तान बना देते हो, एक भिखारी को सुल्तान बना देते हो, ऐसी होती है तेरी करामात ख्वाजा जी। इसके बाद उन्होंने जैसे ही बाबा सदन की शान में पढ़ा- रोज देता है और बार बार देता है हमारा सदन हमें बेसुमार देता है, सदनशाह बाबा मुझे देते हैं तो काम चलता है, इनके टुकड़ों पर मेरा खानदान चलता है ... जिसको श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना और नवी की शान में नारे लगाने शुरु कर दिये। जिसे सुनकर लोग जमकर झूम उठे ब नोट की बारिश कर दी। कव्वालियों का सिलसिला सहरी तक चलता रहा।
आज रहेंगे प्रख्यात कब्बाल
हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह की दरगाह पर आज तीन अप्रैल को सलीम जावेद बैंगलोर, कर्नाटक, टीवी सिंगर इंटरनेशनल फेम कब्बाली पेश करेंगे।

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