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शिव धनुष टूटा देख आग बबूला हो गए परशुराम

Monday, October 3, 2022

/ by Today Warta



राकेश केशरी 

गुवारा में रविवार की रात परशुराम-लक्ष्मण संवाद व राम विवाह की लीला का किया गया मंचन

कौशाम्बी। शिव धनुष तोड़ने वाला तो कोई शिव प्यारा ही होगा...जिसने ऐसा अपराध किया, वह दास तुम्हारा ही होगा.....। राजा जनक के दरबार में आयोजित सीता स्वयंवर के कार्यक्रम में टूटा शिव धुनष देख परशुराम ने जब राजा जनक से सवाल किया तो भगवान श्रीराम ने बड़े ही विनम्रता से ही कुछ इस तरह से जवाब दिया। मगर परशुराम का क्रोध शांत नहीं हुआ और वह भड़क उठे। इस पर लक्ष्मण भी क्रोधित हो उठे। फिर परशुराम व लक्ष्मण के बीच तीखा संवाद हुआ। मंगलवार रविवार को गुवारा तैयबपुर गांव में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने सीता स्वयंवर का मार्मिक मंचन किया। धनुष भंजन की गर्जना सुनकर भगवान परशुराम जी की समाधि टूट जाती है। वे जनकपुर पहुंचते हैं। एकाएक परशुराम को देख सीता स्वयंवर में मौजूद राजाओं की घिग्घी बंध जाती है। पिता के नाम के साथ अपना नाम लेकर सभी ने मुनि के चरणों में प्रणाम किया। राजा जनक भी सीता को साथ लेकर परशुराम मुनि का अभिवादन करते हैं। इसके बाद भगवान परशुराम की निगाह टूटे हुए शिव धनुष पर पड़ती है। वे आक्रोशित हो उठते हैं। राजा जनक से कहते हैं कि श्वेगि देखाऊ मूढ़ नत आजू, उल्टउ महि जहं लगि तव राजू।। राजा जनक उसे मेरे सामने लाओ जिसने शिव धनुष का भंजन किया है। अन्यथा सब राजा मारे जाएंगे। अचानक मुनि की मौजूदगी देखकर सीता जी की मां सुनैना दुखी हो जाती हैं। वे पछताते हुए कहती हैं कि विधाता ने यह क्या कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम परशुराम जी को प्रणाम कर कहते हैं कि नाथ शंभु धनु भंजनिहारा, होइहहिं कोइ एक दास तुम्हारा। इस पर परशुराम जी कहते हैं कि सुनहु राम जेहि शिव धनु तोरा सहसबाहु सम सो रिपु मोरा। परशुराम का बढ़ता क्रोध देखकर लखन लाल मुस्कुराते हुए कहते हैं कि बहु धनुही तोरी लरिकाई, कबहुं न अस रिसि कीन्हिं गोसाई। एहि धनु पर ममता केहि हेतू, सुनि रिसाई कह भृग कुल केतू। परशुराम द्वारा बार-बार फरसा दिखाने पर लक्ष्मण जी कहते हैं कि यहां कोई कुम्हडे की बतिया नहीं है जो तर्जनी दिखाने पर मुरझा जाएगा। परशुराम लक्ष्मण संवाद की यह लीला घंटों चली। अंत में भगवान श्रीराम ने परशुराम से कहा कि आप श्रेष्ठ हैं। बररै व बालक का स्वभाव एक तरह का होता है। इनके मुंह नहीं लगना चाहिए। राम के विनम्र भाव को देखकर परशुराम जी का क्रोध शांत हो जाता है। वे संदेह खत्म करने के लिए राम को धनुष देते हुए उस पर चाप चढ़ाने के लिए कहते हैं। श्रीराम क्षण भर में धनुष पर चाप चढ़ा देते हैं। इसके बाद परशुराम जी उनकी स्तुति कर चले जाते है। इसके राम विवाह की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।

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