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सहरिया आदिवासियों ने वन भूमि पर मांगे पट्टे

Monday, November 21, 2022

/ by Today Warta



इन्द्रपाल सिंह प्रिइन्द्र

डीएम को ज्ञापन भेजकर उठायी समस्या निस्तारण की मांग

ललितपुर। जनपद में वन भूमि पर आदिवासी सहरियाओं को पट्टे दिये जाने और वन अधिकार अधिनियम का सख्ती से पालन कराये जाने की मांग को लेकर कई गांवों के सहरिया समुदाय ने आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह लोधी एड. एवं ग्राम मादौन प्रधान सुदामा मिश्रा के संयुक्त नेतृत्व में जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में बताया कि आदिवासी अनुसूचित जन जाति के लोग ललितुपर जिले के निवासी हैं। सहरिया जाति की ललितपुर जिले में करीब 1 लाख जनसंख्या है और ललितपुर जिले में वन विभाग की भूमि कई हजार हेक्टेयर में है और हम वनवासी आदिवासी ललितपुर जिले में कई ग्रामों में रहते हैं। वन भूमि पर हमारे पूर्वज सैकड़ों वर्षों से खेती कर अपना जीवन यापन करते हैं। वन विभाग के पेड़ों से जो पैदावार होती है तो उसे बाजार में बेचकर खर्चा चलाते हैं। बताया कि कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2006 में वनाधिकार कानून पास कर दिया है जिसकी सूचना जिले के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा हम आदिवासियों को नहीं दी गयी और न ही मौजा देहा लेखपाल ने किसी ग्राम में वनाधिकार के पट्टों की सूचना दी कि जब वर्ष 2010 में जनप्रतिनिधियों से जानकारी कर हम लोगों ने अपने ग्राम मादौन, कपासी, धाँजरी, पिपरई, धौर्रा एवं आस-पास के गांवों में आदिवासियों ने वनाधिकार के तहत प्रार्थना पत्र गांव सभा की वन कमेटी के यहां प्रस्तुत किया और ग्राम वन कमेटी ने प्रस्ताव डालकर हमारे प्रार्थना पत्र तहसील स्तर के वनाधिकार कमेटी को भेज दिये। करीब 12 वर्षों से कोई कार्यवाही नहीं हुई न ही किसी अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी समझी। उल्टे जब आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय जी ने संज्ञान लिया तो ग्राम के लेखपाल कानूनगो व तहसीलदार ने वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर हम गरीब लोगों के वनाधिकार के प्रार्थना पत्रों को अस्वीकृत (निरस्त) कर ग्राम पंचायत भवन पर निरस्त पट्टों की सूची चस्पा कर दी। जिससे हम वनवासियों काफी आहत हैं। उन्होंने सहरिया समुदाय के लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे दिये जाने की मांग उठायी है। ज्ञापन देते समय मुन्ना, सूरज, भागवती, रामरानी, पुन्नी, कला, सपना, चांदा, क्रान्ति, चंदा, तीता, भूमिका, रामू, खुमान, जितेंन्द्र, कला, शुशीला, सोमही, काशीरम, रतन, मोडवाई, अमित, समकाली, जयाला, लघु, कन्हाई, मनोदर, बुकलाम के अलावा अनेकों लोग मौजूद रहे।

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