राजेंद्र प्रसाद मिश्रा
बारा तहसील के विकासखंड जसरा के तातारगंज ग्राम सभा में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस आचार्य प्रवर श्याम सुंदर त्रिपाठी द्वारा 13 नवम्बर को शोभा कलश यात्रा से प्रारंभ की गई भागवत कथा भक्ति रसामृत प्रवाहित करती हुई आज अंतिम दिन सप्तम सोपान तक पहुँची। आचार्य जी द्वारा भगवान के दिव्य स्वरूपों का वर्णन करते हुए बताया गया कि प्रभु के भाल पर कस्तूरी तिलक,वक्षस्थल पर कौस्तुभमणि,नाक के अग्रभाग में मोती की बाली,हाथ में वंशी,सम्पूर्ण शरीर पर हरिचंदन का लेप है,ऐसे प्रभु हमेशा सभी का कल्याण करें। कथा क्रम में सत्यभामा, जाम्बवती तथा कालिंदी सहित 16108 रानियों के पाणिग्रहण का विस्तार से वर्णन किया। उषा-अनिरुद्ध विवाह,जरासंध वध,राजसूय यज्ञ,शिशुपाल उद्धार की कथा संक्षेप में सुनाई गई।पोरबन्दर निवासी,महाज्ञानी जितेंद्रिय और पवित्र ब्राह्मण सुदामा का मित्र कृष्ण से मिलन का भावपूर्ण करते हुए माता पिता देवकी वसुदेव को ब्रह्मज्ञान का उपदेश तथा अंत में राजा परीक्षित के निर्वाण का वर्णन करते हुए कथा को विराम दिया गया। कल दिनांक 21.11.22 को पूर्णाहुति हवन व कथा प्रसाद का वितरण किया जाएगा,भक्तजन प्रसाद ग्रहण कर भागवत सप्ताह यज्ञ के यश व पुण्य के भागी बनें।श्रोताओं में कन्हैया लाल मिश्र, कामता मिश्र, धर्मराज द्विवेदी,जागृति पाण्डेय,बचऊ सिंह,बब्बन सिंह,शिवराम दुबे,पचखरा प्रधान हीरामन सिंह,कमला दुबे,घनश्याम मिश्र,मेलाराम,संतोष पाण्डेय,रज्जन सोनी,लल्लू सिंह, कल्लू सेन,सुरजू हरिजन,धर्मराज,आदि सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे। आए हुए सभी भक्तों का राजाबाबू पाठक, हरिविलास पाण्डेय,चंद्रशेखर पाण्डेय, रमेश पाण्डेय,शंकर सिंह,रमेश सिंह, कमलाकांत दुबे,विनोद पाण्डेय व श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी आचार्य राधेश्याम पाठक जी द्वारा वक्ता श्रोता तथा समस्त आगन्तुकों का आभार ब्यक्त किया गया।

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