संजय धर द्विवेदी
लालापुर।सरकार लाखों -करोंडों रुपए खर्च कर ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने में लगी परंतु लालापुर क्षेत्र स्थित चिल्ला गौहनी गांव में आल्हा-ऊदल का अखाड़ा पशु बाड़ा बन गया है।पशुओं से परेशान किसानों ने आवारा पशुओं को तीन दिन से अंदर बंद किया है।गांव में निवास करने वाले कर्मचारी ग्रामीणों के डर से पशुओं को बाहर निकालने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
लालापुर क्षेत्र के चिल्ला गौहनी गांव में आल्हा-ऊदल का अखाड़ा स्थित है।जो अब पुरातत्व विभाग के देख-रेख में है।पुरातत्व विभाग ने देख रेख के लिए कर्मचारी तैनात किया है।तीन दिन से गांव के ग्रामीण आवारा पशुओं को इकट्ठा कर महल के अंदर बंद कर दिए हैं।वीरगाथाओं की कहानी व वीरता के गीतों में अपना स्थान रखने वाले आल्हा ऊदल के महल का ये हाल होगा कोई कल्पना नहीं कर सकता ।परंतु आज उनका भी मन दुखित होगा जो वीरगाथाओं की कहानियाँ सुनकर गर्व से सीना चौड़ा करते थे।ग्रामीणों के डर से स्थानीय कर्मचारी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।

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