राकेश केसरी
कौशाम्बी। इमरजेंसी में पीने के पानी को कोई प्रबंध नहीं है। डाक्टर और कर्मचारियों को बाथ बेसन से पानी लेना पड़ता है। रोगियों व तीमारदारों के लिए तो बाथरुम के नलों का ही सहारा है। इससे रोगी व तीमारदार हो अथवा डाक्टर व कर्मचारी सभी को पीने का पानी लेने के लिए लगभग दो सौ मीटर दूर आरओ तक चक्कर काटना पड़ता है। जिला अस्पताल में रोगियों की सुविधा के लिए तीस बेड की इमरजेंसी का निर्माण कराया गया। जिसमें औसतन पचास से अधिक मरीज इस समय भर्ती हो रहे हैं। इसके अलावा डाक्टर से लेकर सफाई कर्मचारी तक मिलाकर लगभग 20 लोग हर समय ड्यूटी पर रहते हैं। तीमारदारों की भीड़ रहती है वह अलग से। इमरजेंसी में बेड से लेकर प्रतीक्षालय तक का बंदोबस्त तो किया गया पर पीने के पानी का कोई प्रबंध नहीं किया गया। निर्माण के समय स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की इस चूक का खामियाजा रोगी और तीमारदार ही नहीं डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मी भी भुगत रहे हैं। पीने का पानी लेने के लिए उन्हें इमरजेंसी से लगभग दो सौ मीटर दूर आरओ तक जाना पड़ता है। यही नहीं इमरजेंसी पडने पर रोगियों को बाथरुम से पानी लेना पड़ता है या फिर बाहर से खरीद कर पानी लाना पड़ रहा है। पेयजल संकट से जूझ रहे रोगी और तीमारदारों के साथ ही चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों में भी इस समस्या को लेकर आक्रोश है। सीएमएस डा0 दीपक सेठ ने कहा कि आरओ बहुत दूर नहीं है फिर भी समस्या आ रही है तो मैं स्वयं इस संबंध में बात कर पेयजल का प्रबंध कराऊंगा।

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