धंनजय सिंह
अस्पताल परिसर के घुप अंधेरे में चलता है शराब का दौर,रंगीन होती है शाम
चायल,कौशाम्बी। नगर पंचायत चरवा स्थित न्यू पीएचसी इन दिनों शराबियों का अड्डा बन गई है। 1974 में बनी ये पीएचसी किसी जमाने में गुलजार थी। दूर दूर के लोग अपना इलाल कराने के लिए यहां आया करते थे। इस अस्पताल में बकायदा डॉक्टरों के रहने के लिए कई कमरों की बिल्डिंग बनाई गई थी। छोटे मोटे आॅपरेशन के साथ कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी इसी परिसर में किया जाता रहा है। और मरीजों के इलाज के लिए 24 घंटे की व्यवस्था थी। मगर समय के साथ चरवा की आबादी बढ़ती गई और चरवा अस्पताल में मिलने वाली सुविधा कम होती चली गई। अमूमन आज चरवा नगर पंचायत की आबादी कागजों में लगभग 30 हजार है। जिसमे आधी से ज्यादा आबादी गरीबी और कम संसाधनों में जीवन यापन करती है। ऐसी स्थिति में आज अस्पताल में आने वाले लोगों को इलाज के नाम पर सिट्रीजिन, पैरासिटामोल, लाइवोफ्लॉक्स, सिप्प्रो, मेट्रोजिल आदि सारी दवाओं के अलावा किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। और वो भी 10 से 4 बजे तक। आज शाम होते ही पूरा अस्पताल परिसर घुप अंधेरे के आगोश में आ जाता है। रात में इतने बड़े अस्पताल परिसर में सिर्फ महिलाओं के कंधे में पूरी व्यवस्था डाल दी गई है। और ये व्यवस्था सफाई कर्मी सीता जो इसी परिसर में अपने परिवार के साथ रहती है और दूसरी है रेनू जो संविदा स्टॉफ नर्स है और 24 घंटे अपनी ड्यूटी देती हैं। जिनके कंधे में प्रसव की जिम्मेदारी है। असपाल में कोई भी चैकी दार नही है। अस्पताल की बाउंड्री टूटी हुई है। परिसर में लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से शाम होते ही पूरे परिसर में शराबियों का कब्जा हो जाता है। चरवा चैराहे के नजदीक स्थित ये अस्पताल और अस्पताल के चंद कदम की दूरी पर स्थित शराब का ठेका। जो शराबियों को शराब पीने का मुफीद और सुरक्षित अड्डा बन गया है। अस्पताल परिसर की सफाई की व्यवस्था संभाल रही सीता जो की इसी परिसर में अपने पूरे परिवार सास, ससुर बेटा और अपनी 22 वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं। इसका कहना है की शाम होते ही पूरे परिसर में शराबी यहां वहां बैठ के दारू पीते है और आपस में गंदी गंदी गाली बकते हैं। बहुत डर लगता है मगर क्या करें। वही स्थित स्टाफ नर्स रेनू की है जो रात में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं का सुरक्षित प्रसव के साथ साथ सुरक्षा व्यवस्था की भी जिम्मेदारी उठाती है। कहती हैं की रात भर किसी अनहोनी की आशंका के बीच ही रात कटती है। वही कर्मचारियों और अस्पताल के मुख्य डॉक्टर की बात करें तो अभी वर्तमान में दो डॉक्टर तैनात है,डॉक्टर वीके मिश्रा, महिला डॉक्टर डॉक्टर मधुरिमा यादव,तीन फरमाशिस्ट,धर्मेश त्रिपाठी,रमेश सिंह,संतोष पाण्डेय,एलटी तारा सिंह तैनात है जो अपनी ड्यूटी भी दे रहे हैं। इनमें से फर्माशिष्ट धर्मेश और रमेश सिंह ने बताया की रात में परिसर में प्रकाश की व्यवस्था ना होने की वजह से पूरा परिसर चोर,उचक्के, बदमाश और दारूबाज मवालियों से भरा रहता है। इसके लिए चरवा नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी सुभाष चंद्र सिंह को कई बार लिखित में समस्या का समाधान के लिए कहा गया मगर आज कल कहने के आलावा आज तक स्थिति भयावह बनी हुई है। जिसकी कोई भी सुध लेने वाला नहीं है। इस मुद्दे पर दूर भाष पर चरवा नगर पंचायत अधिशाषी अधिकारी सुभाष चंद्र सिंह से बात करने की कोशिश की गई मगर संपर्क नहीं हो पाया।

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