राकेश केशरी
कौशाम्बी। किस.किस का नाम लूं,मुझे हर किसी ने मारा..। यह बोल दशकों से हर मन गुनगुनाता है। पूरी तरह परोपकार का जीवन दर्शन समझाने वाले हरियाली के हस्ताक्षर पेड़ों की शायद यही आवाज है। यानी कि बेहिसाब पेड़ों की कटान की ओर शायद आला हाकिमों का ध्यान नहीं है। तभी तो पेड़ के तने और शाखाओं की लूट का सिलसिला बदस्तूर जारी है। तीन रेंज में बंटे जनपद के वन क्षेत्रों में हरियाली के दुश्मन पूरे फार्म में हैं। ईट भट्टों पर जलावनी लकड़ी का खर्च और प्रयागराज की मण्डी के लिए चोरी से काटे गए पेड़ रोजाना निगरानी की पोल खोल रहे हैं। क्षेत्र के वन माफिया जनपद को अपना ठिकाना बना लिए हैं। जबकि प्रभागीय वनाधिकारी कहते हैं कि वृक्ष की सुरक्षा को लेकर सरकार की योजनाएं पूरी तरह प्रभावी हैं। पेड़ न कटे इसके लिए विभाग आरा मशीनों की निगरानी विशेष रूप से कर रहा है। तीन रेंजों में पेड़ों की रक्षा का तंत्र क्रियाशील है। जो सूचनाओं का फौरी संज्ञान लेता है। लेकिन उनके तर्क पर लकड़हारो की कुल्हाड़ी की धार कुन्द कर रही हैं।

Today Warta