इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
शाही पंचकल्याणक में गर्भकल्याणक में माता मरूदेवी ने महाराजा नाभिराय को बताए सोलह स्वप्न अष्टकुमारियों ने की माता की सेवा
ललितपुर। निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने गर्भपात को महापाप बताते हुए कहा अपनी भावनाए पवित्र रखो और गर्भपात जिसमें अपने पेट में बनने वाले बूचडखाना जहां असहाय जीव को मारदिया जाता है इसके महापाप से वचो। जहां गर्भ में आते ही तीन लोक में खुशियां छाई वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके गर्भ में आते ही दुखी हो जाते हैं और गर्भपात जैसा महापाप करते हैं और जन्म से पहले ही नवजात को मार दिया जाता है। मां बनना कोई साधारण बात नहीं गर्भपात के परिणाम नहीं आना चाहिए। मुनि श्री ने कहा गर्भपात जैसे जघन्य अपराध करने से कई जन्मो तक भटकना पडता है। गर्भपात के कुकृत्य पर शंखनाद करते हुए मुनिश्री ने पंचकल्याणक के गर्भकल्याण में उपस्थित इन्द्र इन्द्राणियों के समूह को जागृत किया कि अपनी कोख को पवित्र बनाओ जिससे धर्म और संस्कृति की रक्षा हो सके। शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में गर्भकल्याणक पर मुनिश्री सुधासागर महाराज ने अहंकार को विनाश का कारण बताते हुए कहा कभी अपने धन और प्रतिष्ठा पर अहंकार नहीं करना। धन और दान की श्रेष्ठता पर उन्होने कहा धन वैभव अपने पुण्य से मिलता है उसको दान में लगाने के वाद धर्म क्षेत्र में श्रेष्ठता पाई तो कई भवों को सुधारता है और वहीं सब कुछ करने के बाद अहंकार करना पतन का कारण होता है। सुबह प्रभु अभिषेक शान्तिधारा पुण्र्याजक परिवारों द्वारा की गई। मध्यान्ह में महाराजा नाभिराय के दरवार लगा जिसमें भगवान की माता मरूदेवी की सीमंतनी क्रियाएं तीर्थकर माता गोद भराई हुई जिसमें महिलाओं ने भक्तिपूर्वक सम्मलित होकर पुण्र्याजन किया। इस मौके पर मुनि पूज्य सागर महाराज ने ललितपुर के अभिनंदनोदय तीर्थ के गौरवशाली इतिहास को बताया और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा को पुण्य के क्षण बताए। सायंकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनिश्री ने श्रावको द्वारा की गई। जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया इसके उपरान्त अयोध्यापुरी में महाराजा नाभिराय के दरवार में राज्य व्यवस्था की चर्चा और माता मरूदेवी ने सोलह स्वप्नों की महाराज नाभिराय को जानकारी दी जिसका उन्होने फलादेश बताया। छप्पन कुमारिकाओं ने माता मरूदेवी की सेवा की और अपनी ओर से भेंट समर्पण की। प्रतिष्ठा महोत्सव की व्यवस्थाओं को वीर व्यायामशाला, आचार्य विद्यासागर सेवा संघ, स्याद्वाद बद्र्धमान सेवा संघ, वीरसेवा संघ, आदिनाथ सेवा संघ, भारतीय जैन मिलन वाहुवलि सेवा संघ,जैन सेवा संघ, तारण तरण युवा सेवा समिति, जैन एम्बुलेंस समिति, वीर क्लव, जैन सेवा संघ महिला मण्डल गल्ला व्यापार मण्डल, उद्योग व्यापार मण्डल द्वारा संयोजित की जा रही है।
इन्द्र इन्द्राणियों के सैलाव से हुआ शाही पंचकल्याणक
धर्मसभा में मुनि सुधासागर महाराज ने अपने अंदाज में कहा आज प्रात:काल अयोध्यापुरी के प्रतिष्ठा मण्डप में इन्द्र इन्द्राणियों का अलोकिक दृश्य देखते ही बनता रहा। मुख्यपात्र तो हर पंचकल्याणक में रहते लेकिन सामान्य पात्रों का समूह जो 750 फीट लम्बे विशाल पंडाल रहा इस पंचकल्याणक की महासत्ता बना जिसको देखकर आंखें तृप्त हुई कि दुनिया का स्वरूप भी ऐसा हो जिसमें धर्म संस्कृति का वहुमान रहे। हमें कहने में कोई संकोच नहीं कि आयोजकों ने इसको शाही पंचकल्याणक कहा पूरा पाण्डाल जयजय कारेां से गंूज उठा।

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