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कत्लखाना बना जसरा का रेरा गौ संरक्षण केंद्र भूख से तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे गोवंशो की दुर्दशा का आखिर जिम्मेदार कौन‌

Sunday, February 5, 2023

/ by Today Warta



रावेंद्र शुक्ला 

समय से नहीं मिलता दाना भूसा चारा आवारा कुत्तों के ग्रास बन रहे बेजुबान गोवंश

प्रयागराज। जनपद मेंअन्ना गोवंशों की मौत को रोकने के लिए गौ संरक्षण केंद्र सूबे की सरकार द्वारा गांव कस्बे में खोले गए हैं लेकिन कत्लखाने की तरह पशुओं की मौत गौ संरक्षण केंद्रों में हो रही है आखिर गौ संरक्षण केंद्र की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है। योजना के संचालन में लगे अधिकारी केवल फोटो खिंचवा कर शासन को रिपोर्ट भेजने तक सीमित हैं। बात करें जनपद के यमुनानगर विकासखंड जसरा क्षेत्र अंतर्गत गो आश्रय स्थल रेरा की जहां स्थिति बद से बदतर है जहां भूसा और चारा के अभाव में भूख से तड़प तड़प कर अपना दम तोड़ रहे गोवंश आवारा कुत्तों के ग्रास बन रहे हैं। जबकि गो संरक्षण केंद्र में गोवंश की देखरेख के लिए जिले में करोड़ों के बजट सरकारी खजाने से खर्च किया जा रहा है जिले के अधिकारियों के पास भी गोवंश के आंकड़े अलग-अलग विस्तार से उपलब्ध नहीं है। आए दिन बेजुबान गोवंश काल के गाल में समा रहे हैं केवल अभिलेखों में पशुओं का इलाज कर पशुओं की दवाओं को पशु चिकित्सक बेचकर मालामाल हो रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों के सांठगांठ से गौ संरक्षण केंद्र कत्लखाने बन गए हैं।  भरपेट चारा पानी नहीं मिलता तमाम गोवंश भूखे तड़प रहे हैं दिन प्रतिदिन कमजोर और बीमार होते जा रहे हैं जिससे गोवंशों की मौत होना आम बात हो गई है। गौ संरक्षण केंद्र के जिम्मेदारों की मिलीभगत से गौ संरक्षण केंद्र कत्लखाने बनते जा रहे हैं तमाम शिकायतों के बावजूद भी आला अधिकारी गौ संरक्षण केंद्र की बदहाली को ठीक करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं जिससे गोवंशों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। गोवंशों को टैगिंग कर उनके आंकड़ों को रखने का प्रयास नहीं किया गया है पशुओं की मौत के बाद जमीन खोदकर उन्हें वहीं पर दफन कर दिया जा रहा है जिससे गो आश्रय स्थल में गोवंशों के मृत शव को कुत्ते और कौवे नोच नोच कर अपनी क्षुधा शांत कर रहे हैं। गो संरक्षण केंद्र में मौजूद गोवंश और मृतक गोवंश के आंकड़े के रजिस्टर भी नहीं बनाए गए हैं कितने गोवंश की मौत हुई है और कितने गोवंश किस तारीख को केंद्र में आए हैं इनका तारीख वार विवरण केंद्र से लेकर जिले तक में मौजूद नहीं दिखता है जिससे केंद्र प्रभारियों की नियति का अंदाजा लगाया जा सके। वही जब पशु चिकित्सा अधिकारी जसरा से संपर्क साधा गया तो उन्होंने बताया कि 100 गोवंश रजिस्टर्ड है लेकिन मौके पर 128 गोवंश है लेकिन जब गणना की गई तो मात्र 70 गोवंश पाए गए। गोवंशों की बद से बदतर स्थिति के विषय में जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि गोवंशों की निरंतर गिर रही सेहत का कारण समय से पौष्टिक आहार ,भूसा, चारा नहीं मिलने से कमजोर होकर बीमार पड़ जाते हैं। मेरा काम बीमार गोवंश का इलाज करना है शेष जानकारी खंड विकास अधिकारी जसरा से लीजिए। इस बाबत ग्राउंड जीरो से मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज से जब संपर्क साधा गया तो उन्होंने गोआश्रय स्थल में चारे भूसे की कमी की जांच कर कार्यवाही किए जाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। आखिर सवाल यह उठता है कि कब तक बेजुबान गोवंश जिम्मेदारों की मौन स्वीकृति से भूखे प्यासे तड़प तड़प कर असमय काल के गाल में समाते रहेंगे योगी सरकार से बेजुबान फरियाद करते पुकार कर रहे हैं कि चारा भूसा के नाम पर धन हड़प कर अपनी तिजोरी भरने वाले इन जिम्मेदारों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने की पुरजोर मांग करते हुए आवाज दी है कि मेरी भी सुनो सरकार मेरी भी सुनो सरकार।

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