जन्मजात बीमारियों से ग्रसित 66बच्चों की हो चुकी है सर्जरी
ललितपुर। विकास खण्ड बार अंतर्गत ग्राम पुलवारा निवासी प्रेटी राजा की चार वर्षीय पुत्री रौनक की जिंदगी को सच में रौनक बनाने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) सफल रहा। जन्म से सुनने में असमर्थ रौनक के कानों में अब आवाज सुनाई देनी लगी है। वर्तमान में स्पीच थेरेपी दी जा रही है। उसके जीवन में दिख रहे परिवर्तन से परिजन भी खुश हैं। पिता प्रेटी राजा बताते हैं कि रौनक की गतिविधियां काफी लेट शुरू हुई। तीन साल में तो उसने पैदल चलना आरंभ किया था। एक रोज जब मेरे पिता के मित्र जो कि पेशे चिकित्सक हैं, उन्होंने रौनक से बात करने का प्रयास किया, तो रौनक के ध्यान न देने पर उन्होंने बताया कि शायद बिटिया को सुनने में दिक्कत हैं। तब तक हम यही माने हुए थे कि वह देरी से ही सब कर रही है। पिता के मित्र की सलाह पर जब अस्पताल में जाँच करायी तो चिकित्सक ने बताया कि बच्ची को दस प्रतिशत ही सुनाई देता है। डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। ऑपरेशन का खर्चा करीब सात से आठ लाख रुपए का आ रहा था। इतने पैसे की व्यवस्था नहीं थी इससे मन में निराशा का भाव उत्पन्न हो गया। इसी दौरान आरबीएसके के ही एक और लाभार्थी से मुलाकात पर आरबीएसके के बारें में पता चला। सीएमओ कार्यालय पहुंचकर आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डा.सुखदेव पंकज से मुलाकात हुई। उन्होंने बिना किसी देर किए बच्ची की फाइल तैयार करा दी और डॉक्टर एसएन मेहरोत्रा हॉस्पिटल कानपुर के लिए रेफर कर दिया। आरबीएसके अंतर्गत इसी फरवरी माह में रौनक का ऑपरेशन हुआ है। उसके बाद दो बार कानपुर में 35-35 मिनट की स्पीच थेरेपी भी करा चुके हैं। डॉक्टर के अनुसार लगभग एक से दो वर्ष तक स्पीच थेरेपी चलायी जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.जे.एस.बक्शी ने बताया कि बच्चों की जन्मजात बीमारी पर यदि शुरुआती समय में ध्यान दे दिया जाए, तोइलाज संभव है। आरबीएसकेके अंतर्गत जन्मजात ह्रदय रोग, कटे होंठ, गूंगे, बहरे, हाइड्रोसेफेलस, न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, टेढ़े मेढ़े पैरो का इलाज किया जाता है। इस कार्य में विभिन्न संस्थाएं भी सहयोग कर रही हैं। इनमें स्माइल ट्रेन आगरा, डा.एस.एन.महरोत्रा फाउंडेशन, मिरकल फीट इंडिया, श्रीसत्य साईं हॉस्पिटल पलवल हरियाणा संस्था शामिल है। आरबीएसके के माध्यम से अप्रैल 2022 से अभी तक 66 जन्मजात बीमारियों से ग्रसित बच्चों की सर्जरी कराई जा चुकी है। गूंगे बहरे बच्चो को ऑपरेशन के उपरांत स्पीच थेरेपी दी जाती है, ताकि बच्चे सामान्य बच्चों की तरह भाषा को समझ व बोल सके। आरबीएसके नोडल अधिकारी डा.आर.एन.सोनी ने बताया कि आरबीएसके के अंतर्गत शून्य से 19 वर्ष तक के बच्चों का फॉर डी के अंतर्गत आने वाली 44 जन्मजात बीमारियों का इलाज किया जाता है। इस कार्य में आरबीएसके की ब्लॉकस्तरीय टीम लगी हुई हैं, जो समय समय पर स्कूल,आंगनबाड़ी एवं डिलेवरी प्वाइंट पर भ्रमण कर बच्चों का चिन्हीकरण करती हैं। इसके उपरांत चिन्हित बच्चों का उपचार संबंधित चिकित्सालय में कराया जाता है।
इन बीमारियों की हुई सर्जरी
डीईआईसी मैनेजर डा.सुखदेव पंकज ने बताया कि आरबीएसके के तहत क्लेफ्ट लिप एंड पेलेट के 17, क्लब फुट के 15, सीएचडी (कनजिनाईटल हार्ट डिजीज) के 3, कनजिनाईटल केट्रेक्ट का 1, आरएचडी (रूमेटिक हार्ट डिजीज) का 1, एनटीडी (न्यूरल ट्यूब फिकेक्ट) के 3, कनजिनाईटल डिफ्नेस के 5, हाइड्रोसेफेलस का 1, व अन्य 20 की सर्जरी कराई गई है। इस तरह जिले में 66 बच्चों की सर्जरी की जा चुकी है।

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