इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के संयोजक एवं उन्नत भारत अभियान के कोऑर्डिनेटर डॉ संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि परीक्षा को लेकर सकारात्मक तनाव एक सामान्य बात है इससे विद्यार्थियों की निष्पादन क्षमता बढ़ जाती है। लेकिन कई बार देखने में आता है कि छात्र-छात्राएं परीक्षा को लेकर गंभीर तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं जिससे उनका अध्ययन एवं परीक्षा परिणाम बुरी तरह प्रभावित हो जाता हैं। विद्यार्थी से परीक्षाओं में सबसे बेहतर करने की अपेक्षा, माता पिता की ओर से की जाने वाली अतिरिक्त अपेक्षायें,समाज का भय,असफलता का डर,अपने साथियों के समूह में बेहतर करने का दबाव, इसके अतिरिक्त नियमित न अध्ययन करना अनियमित दिनचर्या, नकारात्मक विचारों से ग्रस्त रहना, पर्याप्त नींद न लेना, संतुलित आहार ना लेना, भरपूर नींद न लेना, सोशल मीडिया पर अधिक समय व्यतीत करना, वर्ष भर पढ़ाई ना करना परीक्षा को सामने देख भयभीत होना आदि कारणों से विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव का सामना करना पड़ता है। परीक्षा तनाव का सही प्रबंधन ना होने कारण बच्चे मानसिक समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं। परीक्षा के तनाव के चलते कभी-कभी विद्यार्थी आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। बच्चों को यह समझना चाहिए कि जीवन बहुमूल्य है इसके महत्व को समझें। दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान संभव ना हो ।इसलिए विद्यार्थी अपने माता-पिता एवं गुरुजनों का सहयोग लेकर अपनी समस्याओं का समाधान खोजें। डा.शर्मा आगे बताया कि परिजन एवं सगे संबंधी परीक्षा संबंधी भय का माहौल न बनाएं, विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन करें ताकि विद्यार्थी परीक्षाओं को उत्साह, उत्सव एवं बेहतर अवसर के रूप में लें, बच्चों पर हर समय पढऩे के लिए अत्यधिक दबाव न बनाएं, दूसरे बच्चों के साथ तुलना ना करें ,परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए अनावश्यक दबाव न बनाएं, परीक्षा अवधि ने बच्चों के व्यवहार पर कड़ी नजर रखें और व्यवहार में होने वाले परिवर्तन को नजरअंदाज ना करें, बच्चों के साथ बातचीत करते रहें एवं उनके लिए पौष्टिक भोजन का प्रबंध करें। विद्यार्थी परीक्षा तनाव से बचने के लिए परीक्षा को चुनौती नहीं एक अवसर के रूप में स्वीकार करें, परीक्षाओं में सम्भावनाएं तलाशे, अपनी मेहनत पर भरोसा रखें, रात में कम से कम 6 घंटे नींद अवश्य लें, संतुलित भोजन करें, नियमित सुबह टहलने जाएं, शारीरिक सक्रियता बनाए रखें। विद्यार्थी अध्ययन करते समय प्रत्येक एक या दो घंटा के बाद 5 से 10 मिनट विराम ले, पढ़ते समय अपनी स्मृति की जांच करते रहे, विषय को उसका अर्थ समझकर पढऩा चाहिए, पढ़ते समय मानसिक सतर्कता एवं एकाग्रता बनाये रखे, अपनी स्मरण शक्ति पर विश्वास करे।विषय की उपयोगिता को ध्यान में रखकर सीखे,आत्मविश्वास बनाये रखे, पढ़ाई में रुचि एवम दिलचस्पी ले,विषय का अधिकाधिक अभ्यास करें।, सोशल मीडिया पर ज्यादा समय व्यतीत ना करें, पढ़ाई में बाधा उत्पन करने वाले कारको को हटा दें, तर्क वितर्क, चिंतन के साथ विषय को पढ़ें।

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