राकेश केशरी
कौशाम्बी। केन्द्र के निर्देश के बाद एक दशक पहले देश के सभी जनपदो व ग्रामीण क्षेत्र से ठगी करने वाली कंपनियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा कर अपनी दुकान लगा लगाई थी। देश के प्रत्येक जिले के तमाम परिवार के भोले भाले लोगों ने कंपनियों में पैसा जमा कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में फ्राड करने वाली ऐसी सभी कंपनियों के लाइसेंस को निरस्त करते हुए उनकी दुकानें बंद करा दी थी। जिसके बाद उक्त कंपनियो में निवेष करने वाले सभी उपभोक्ताओं का पैसा डंप हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 में दोनों सदनों में कानून को पारित करते हुए प्रत्येक जिले के जिम्मेदारों के यहां से काउंटर खोल कर डॉक्यूमेंट जमा करने के निर्देश दिए निर्देश दिया था। निर्देश के क्रम में प्रत्येक जिलों के जिम्मेदारों ने अपने कलेक्टर आॅफिस में काउंटर खोल कर ठगी पीड़ित परिवार के ग्राहकों का डॉक्यूमेंट जमा कराना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि उ0 प्र0 सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गृह क्षेत्र होने के साथ विनोद सोनकर दो बार से सांसद हैं उनके क्षेत्र में जनपद मुख्यालय मंझनपुर के कलेक्ट्रेट कार्यालय के कमरा नंबर 28 में 21 फरवरी से ठगी के शिकार हुए लोगो के फार्म जमा कराना बंद कर दिया गया। 22 फरवरी को किसान यूनियन व कांग्रेस पार्टी द्वारा हल्ला किए जाने पर जिलाधिकारी के आदेश पर फिर से ठगी पीड़ित के डॉक्यूमेंट ले लिए गए। लेकिन 23 फरवरी को पीडितो को कह कर लौटा दिया गया कि आप लोग अपने अपने डाकघरों से डॉक्यूमेंट को भेजें। ठगी पीड़ित परिवार के लोग मायूस होकर एक दूसरे के मुंह ताकते हुए अपने घर को लौट गए। सवाल यह उठता है कि जिला अधिकारी के द्वारा ठगी पीड़ित परिवार के लोगों को डाकघर में फार्म जमा कराने का निर्देश दिया गया। जबकि जिलाधिकारी ने अपने कलेक्ट्रेट आॅफिस में कमरा नंबर 28 में काउंटर खुलवाया तो बोर्ड लगवाया, उस बोर्ड पर लिखा गया कि समस्त कंपनियों के द्वारा ठगी पीड़ित परिवार का डॉक्यूमेंट यहां जमा होगा। तो पीडित आकर जमा करने लगे अब जिला अधिकारी ने पीडितो से कह दिया कि डाकघर से भेजें,तो सोचने की बात है की क्या जिलाधिकारी अपने यहां अतिरिक्त काउंटर नहीं खुलवा सकते हैं। जबकि कौशाम्बी की 50 फीसद अशिक्षित है,यह सब जानते हुए जिलाधिकारी ने ग्राहकों के लिए असुविधा के लिए बोर्ड पर यह नही लिखवाया कि किस पता पर,कहां पर डाक के द्वारा फार्म भेजा जाए। जबकि गरीब, मजदूर व किसानों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

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