इन्द्रपाल सिंह'प्रिइन्द्र
सहरिया समुदाय ने आप जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में डीएम को सौंपा ज्ञापन
ललितपुर। तहसील पाली अंतर्गत ग्राम बालाबेहट के मजरा कछियाहार वरना में आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करते हुये नोटिस दिये जाने और जमीन व मकान से बेदखल किये जाने का प्रयास किये जाने का आरोप लगाते हुये सहरिया समुदाय के लोगों ने आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह लोधी एड. के नेतृत्व में एक ज्ञापन जिलाधिकारी को भेजा है।
ज्ञापन में बताया कि बालाबेहट क्षेत्र में कई दशकों से सहरिया आदिवासी निवासरत है। बताया कि यहां उनके पूर्वज ग्राम बालाबेहट के मजरा में डईया खेती करते थे पूर्वजों के मरने के बाद लोग अपने जीवन यापन के लिये वन विभाग की भूमि पर अपने 100 वर्षों में कब्जे के हिसाब से डईया खेती करते चले आ रहे है। बताया कि भारत सरकार द्वारा लोकसभा में वर्ष 2006 में अनुसूचित जन जाति आदिवासियों को कानून पास किया था कि जो भी अनुसूचित जन जाति आदिवासी के लोग वन विभाग कि भूमि पर कब्जा कर डईया खेती करते चले आ रहे है और वन में निवास कर रहे है एवं बन के फलदार वृक्षों से अपना जीवन यापन कर रहे है, उन्हे वनाधिकार 2006 के कानून के तहत वनाधिकार पट्टे दिये जाये व अपना पैदावार के भी पट्टे दिये जाये कि 2008 में व 2009-10 में हम आदिवासियों द्वारा जिला समाज कल्याण विभाग व जिला अधिकारी के यहाँ सरकार द्वारा जारी किये गये। प्रपत्र के इन प्रपत्रों पर वनाधिकार के पट्टे के लिए कार्य पर दिये थे, आगे कि कार्यवाही हेतु ग्राम सभा कि वनाधिकार समति द्वारा नियमानुसार माखिक साक्ष्य च मौके का साक्ष्य हुआ बधिया, नाली व मंदिर, घर व डइया खेती के साक्ष्य प्रस्तुत कर व ग्राम सभा कि वनाधिकार समति जो समाज कल्याण विभाग द्वारा गठित कि गयी थी उक्त समति द्वारा अपनी ग्राम सभी से वनाधिकार के पट्टे कि आगे की प्रक्रिया हेतु ब्लॉक स्तर कि वनाधिकार समति को भेज दिये थे ब्लॉक कि वनाधिकार कमेटी व तहसील स्तर कि वनाधिकार स्मति के लिए प्रेषित कर दिये गये थे। लेकिन इसके बाद सहरिया आदिवासियों को कोई जानकारी नहीं मिली लेखपाल कानूनगो व तहसीलदार एवं उप जिलाधिकारी द्वारा हमारे वनाधिकार तथ्यों कि क्या कार्यवाही हुई, पता नहीं चल पाया। आपत्ति वर्तमान में हम लोग मजदूरी हेतु बाहर गये हुये थे कि घर आकर देखा तो घर पर एक नोटिस चिपका था। जिस पर लिखा कि तुम लोगों के वनाधिकार के पट्टे वाली कार्यवाही खारिज कर दी गयी। यह नोटिस पढ़वाकर एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे हैं। कहा कि सरकार द्वारा वनाधिकार का कानून लागू कर दिया था तो क्या ललितपुर जिले के कर्मचारियों व अधिकारियों का कर्तव्य नहीं था कि हम गरीब आदिवासियों के लिये सरकार द्वारा पास किये गये कानून की सूचना दे और हम लोगों को वनाधिकार के पट्टों की जानकारी व पट्टे की कार्यवाही हेतु जानकारी दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ फिर भी हम लोगों को ललितपुर जिले की सामाजिक संस्थाओं द्वारा जानकारी देकर वनाधिकारी पट्टे की प्रक्रिया चालू कर पटटे हेतु प्रार्थना पत्र दिलवायें। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की जांच करायी जाकर कार्यवाही किये जाने की गुहार लगायी है। ज्ञापन देते समय आप जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह लोधी एड., विवेक जैन, प्रभात, रामलाल, मोती, प्रकाश, तुसई, फूलसिंह, पप्पू, काशीराम, गुलाब, खुमान सिंह, निशा, प्रेम, सुनील, सनी, जैराम, अनंदी, हरदास, रामलाल, भरत, रमेश, हरीजन, दलीप, गुलाब, गनेश, देवेन्द्र, कुनद, ननू, रामप्रसाद, भागीरथ, सुम्मेर, सुकेन्द्र, राजेश, महेश, इमरत, देवीन, परवास, हानू, हरदास, कल्लू, गुडडी, कम्मेाद, गुलाबरानी, पूनम के अलावा अनेकों सहरिया आदिवासी मौजूद रहे।

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