राकेश केशरी
शोभायात्रा में काफी संख्या में मौजूद रहे भक्त
कौशाम्बी। जैन धर्म के श्री 1008 भगवान श्री महावीर की जयंती सोमवार को सराय अकिल में भक्ति भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर जैन धर्म के अनुयायियों ने सराय अकिल कस्बे में भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा का मार्गों में समाजसेवी,गोपाल जी केशरवानी, अनूप सिंह आदि लोगो के द्वारा जगह-जगह जोशीला स्वागत किया गया। इसके बाद श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित गोष्ठी में जैन समुदाय के लोगों ने जियो और जीने दो का संदेश दिया। भगवान महावीर जयंती पर सोमवार को श्री दिगम्बर जैन मंदिर से जैन मंदिर के अध्यक्ष रविन्द्र उर्फ कल्लू की देख रेख में शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के दौरान महिलाएं भगवान महावीर के भजन गाते व डीजे की धुन पर थिरकते हुए चल रही थीं। शोभायात्रा के दौरान काफी संख्या में भक्त मौजूद रहे। शोभायात्रा के दौरान भगवान महावीर की झांकी भी सजाई गई। शोभायात्रा हनुमान मंदिर से होते हुए रामलीला मैदान,चावल मंडी,चंद्रशेखर आजाद पार्क,भगौतीगंज,पानी टंकी, फकीराबाद से पुनः श्री दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचकर गोष्ठी में परिवर्तित हो गई। इस मौके पर जैन मंदिर के मंत्री जगदीश जैन ने कहा कि भगवान महावीर ने जियो और जीने दो, अहिंसा परमो धमर्रू के सिद्धांत पर चलने का संदेश दिया। वहीं अरहंत जैन ने कहा कि भगवान महावीर राजसी ठाटबाट छोड़कर ज्ञान की तलाश में निकल पड़े थे। उन्होंने कहा कि जियो और जीने दो का अर्थ है कि जिस तरह इंसान को कष्ट होता है, उसी तरह जीव जंतुओं को भी कष्ट होता है, उनमें भी आत्मा है। महावीर स्वामी का संदेश है कि जीव जंतुओं को भी जीने दो। जीव की हत्या न करें। नरेश जैन ने कहा कि अगर मन में किसी के प्रति बुरे विचार आते हैं और हम अपने अंदर के भाव उनके प्रति बुरे करते हैं तो ऐसे कर्मों का फल हमें अगले जन्म में भुगतना पड़ता है। इस मौके पर राकेश जैन,बनारसी जैन,मोनू जैन,विजय जैन,अनूप जैन आदि लोग मौजूद रहे।

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