राकेश केशरी
कौशाम्बी। शनिवार को नगर निकाय चुनाव के एक जनसभा को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पार्टी के भीतर घातियों पर कार्यवाही करने के लिए सख्त हिदायत मंच के माध्यम से दी थी। उसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष अनीता त्रिपाठी ने 18 पार्टी कार्यकतार्ओं पर पार्टी के खिलाफ अनुशासनहीनता में लिप्त होने के कारण कार्यवाही करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इतना ही नहीं यह तो अभी ट्रेलर है, पिक्चर तो नगर निकाय के चुनाव में देखना बाकी है। भारतीय जनता पार्टी में नगर निकाय के चुनाव में एक भौकाली नेता अपना रसूख कायम रखने के लिए उसके मर्जी के खिलाफ प्रत्याशी के चयन होने से आहट भौकाली नेता अपने लोगों के बीच में भितरघात का अथक प्रयास कर रहा है। गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला यह भौकाली नेता 2022 विधानसभा में पार्टी गतिविधियों में लिप्त होकर तीनों सीट को चुनाव हराने में अहम भूमिका निभाई थी। बीते दिनों मंच से जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यह निर्देश दिया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी गतिविधियों में लिप्त होने के बाद भी लोगों को चिन्हित करने के बाद एक बार माफ कर दिया था। लेकिन नगर निकाय के चुनाव में जो भी एक इस गलती को दोहराया पार्टी सख्ती के साथ उन्हें 6 वर्ष के लिए बाहर का रास्ता जरूर दिखाएगी। यह सुनते ही गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले इस नेता के मुंह के रंग की रंगत बदल गई है। बहरहाल कल से यह नेता खामोशी के साथ इस कवायद में जुटा है। कि भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी चुनाव हार जाए। अब देखना यह है, कि आज से यह नेता क्या और कौन सी गतिविधि के साथ कैसा काम करेगा यह कह पाना तो अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस भौकाली नेता के कुछ ऐसे गुर्गे हैं। जो झंडा तो भारतीय जनता पार्टी का थाम के टहल रहे हैं। लेकिन प्रचार समाजवादी पार्टी के खेमे करते हुए दिखाई दे रहे हैं। बाहरहाल इस भौकाली नेता पर जिले के सभी सियासी पंडित निगाह बनी हुई है। अब देखना यह है, कि नेता 2022 की तरह अपने मिशन में कामयाब होता है। या फिर मजबूरन पार्टी के प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करेगा परिणाम कुछ भी हो यह तो अभी कहना जल्दबाजी होगी। यदि भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी चुनाव में हार हुई तो यह भौकाली नेता का क्या होगा। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यह हिदायत दी है। अगर यह नेता अपनी हरकत से बाज नहीं आया तो पार्टी का तो बेड़ा गर्त हो सकता है,लेकिन इस नेता का भविष्य क्या होगा इसका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। खास बात यह है। कि उपमुख्यमंत्री जो बोलते हैं,वह करने में कोई गुरेज नहीं करते।

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